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नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के खतरे के बीच राहत की खबर है. रेमडेसिविर जैसी दवाओं की कालाबाजारी को देखते हुए भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने गंभीर कोविड -19 रोगियों के लिए एक सहायक चिकित्सा के रूप में दवा 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे दी है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे कोरोना के मरीजों को हल्की राहत मिलेगी. 

बताजा जा रहा है कि गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. डीआरडीओ ने कहा कि एक सामान्य अणु और ग्लूकोज का एनालॉग होने की वजह से यह आसानी से उत्पादित और उपलब्ध कराया जा सकता है. 

किसने तैयार की दवा
इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS), डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) की एक लैब ने डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, हैदराबाद के साथ मिलकर दवा विकसित की है. 

दवा कैसे काम करती है

  1. इस दवा के ट्रायल परीक्षण बताते हैं कि दवा में अणु अस्पताल में भर्ती मरीजों की तेजी से रिकवरी करने में मदद करता है और ऑक्सीजन निर्भरता को कम करता है. 
  2. 2-डीजी दवा के ज्यादा उपयोग से आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव देखी गई है. 
  3. डीआरडीओ ने इस बात की जानकारी दी यह दवा पाउडर के रूप में आती है और इस पानी के साथ या पानी में घोलकर लिया जा सकता है. 
  4. यह दवा वायरस संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस के विकास को रोकता है.  

ऑक्सीजन की निर्भरता खत्म करने में मददगार है 2-DG दवा 
जानकारी के अनुसार जिन लोगों को 2-DG दवा दी गई, उनमें से 42% मरीजों की ऑक्सीजन की निर्भरता तीसरे दिन खत्म हो गई. लेकिन, जिन्हें दवा नहीं दी गई, ऐसे 31% मरीजों की ही ऑक्सीजन पर निर्भरता खत्म हुई. यानी, दवा से ऑक्सीजन की जरूरत भी कम हुई. एक अच्छी बात ये भी रही कि यही ट्रेंड 65 साल से ऊपर के बुजुर्गों में भी देखा गया.

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