क्या पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत के साथ तनाव के बीच डिफेंस पैक्ट पर नज़र गड़ाए हुए हैं? CNN-News18 की खबर के मुताबिक सीनियर डिप्लोमैटिक और विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने इस बात का खुलासा किया है कि पड़ोसी देश एक प्रस्तावित आपसी रक्षा समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, जो डिप्लोमैटिक और मिलिट्री जुड़ाव की बहाली के बाद द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े बदलाव का संकेत है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक टॉप सूत्र ने बताया कि इस्लामाबाद और ढाका ने प्रस्तावित समझौते की सामग्री और ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित किया है. 

पाकिस्तान का यह कदम बढ़ते मिलिट्री-टू-मिलिट्री जुड़ाव और करीबी रणनीतिक समन्वय को दर्शाता है. सीनियर डिप्लोमैटिक सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश का मिलिट्री प्रतिष्ठान पाकिस्तान के साथ एक रणनीतिक और रक्षा समझौते के लिए उत्सुक है, जिसका दायरा सऊदी अरब जैसे देशों के साथ इस्लामाबाद की रक्षा सहयोग व्यवस्था के समान होगा. इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के मिलिट्री नेतृत्व के बीच पहले ही कई दौर की बातचीत हो चुकी है. यह प्रस्ताव बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ते जुड़ाव के संकेतों के बीच आया है, जिसमें दोनों पक्षों के सीनियर मिलिट्री अधिकारी सुरक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक-दूसरे के देशों का दौरा कर रहे हैं.

दोनों देशों की सेना अध्यक्षों ने की कई बैठकें
दोनों पक्षों की थल सेना, वायु सेना और नौसेना के टॉप अधिकारियों ने इस साल कई बैठकें की हैं. इन मुलाकातों के बाद ट्रेनिंग क्षमता-निर्माण और प्रोफेशनल आदान-प्रदान पर फोकस करते हुए कई मिलिट्री मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर साइन किए गए हैं. सूत्रों ने बताया कि समझौते पर प्रगति लगातार हो रही है, लेकिन फाइनल ड्राफ्ट बांग्लादेश के आम चुनावों के बाद पूरा होने की उम्मीद है. अगली सरकार इस समझौते की औपचारिक रूप से समीक्षा और मंजूरी दे सकती है.

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शेख हसीना सरकार गिरने के बाद पाकिस्तान से संबंधों में हुआ सुधार
शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद संबंधों में तेजी से सुधार हुआ है, जिससे दोनों पक्ष राजनयिक चैनलों और रक्षा सहयोग को फिर से शुरू करने के लिए तेजी से आगे बढ़े हैं, जो सालों से सीमित था. इसी समय नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंध खराब हुए हैं. व्यापक क्षेत्रीय संदर्भ में, एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने कहा कि कम से कम आठ देशों ने पाकिस्तान के साथ इसी तरह की रणनीतिक और आपसी रक्षा व्यवस्था में रुचि दिखाई है, जो इस्लामाबाद की बढ़ती रक्षा कूटनीति को उजागर करता है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद से पाकिस्तान ने ढाका में नए नेतृत्व को लुभाने में तेजी दिखाई है. इस्लामाबाद उन पहले देशों में से एक था जिसने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का स्वागत किया और बांग्लादेश के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की. दोनों देशों के बीच इस दोस्ती ने दक्षिण एशियाई देश में बढ़ते कट्टरपंथ के डर को फिर से जगा दिया है. इस साल की शुरुआत में ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक की बांग्लादेश यात्रा दशकों में ढाका में किसी पाकिस्तानी खुफिया प्रमुख की यह पहली यात्रा थी. आसिम मलिक की इस यात्रा ने भारत में गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कीं. रिपोर्ट के मुताबिक उद्धृत शीर्ष खुफिया सूत्रों के अनुसार, हालिया रिपोर्टों से पता चला है कि इस्लामाबाद ने चुपचाप ढाका में अपने उच्चायोग के भीतर एक विशेष इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) सेल स्थापित किया है.

भारत में हो सकते हैं आतंकी हमले!
रिपोर्ट के अनुसार, ISI सेल की स्थापना पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के चेयरमैन, जनरल साहिर शमशाद मिर्जा की ढाका की चार दिवसीय यात्रा के बाद की गई थी. वरिष्ठ पत्रकार सुबीर भौमिक ने द फेडरल को बताया कि नई दिल्ली की मुख्य चिंता यह संभावना है कि बांग्लादेश का इस्तेमाल पाकिस्तान या लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे गैर-सरकारी तत्वों द्वारा भारत के अंदर आतंकवादी हमलों को अंजाम देने और फिर पीछे हटने के लिए किया जा सकता है.

भारत-बांग्लादेश युद्ध में किसको फायदा?
जनरल मिर्जा ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति भारत और बांग्लादेश को संघर्ष में घसीट सकती है जिससे सीधे तौर पर पाकिस्तान को फायदा होगा. मंत्राया इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज की फाउंडर शांति मैरिएट डिसूजा ने DW को बताया कि ढाका-इस्लामाबाद संबंधों में बदलाव का भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की सुरक्षा पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तेज़ी से बदलते अंदरूनी और बाहरी हालात से निपटने के लिए नीतियां बनाने के लिए नई दिल्ली को ज़मीनी स्तर पर नज़र रखनी चाहिए.

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