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नई दिल्ली: भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) देश के सबसे कामयाब क्रिकेट कप्तानों में से एक रहे थे. धोनी की कप्तानी में भारत दो बार विश्व चैंपियन बना और पूरी दुनिया को अपना लोहा मनवाया. इसी बीच धोनी को पहली बार भारतीय टीम में लाने वाले पूर्व चीफ सिलेक्टर किरण मोरे (Kiran More) ने उनको लेकर एक बड़ा खुलासा किया है.

मोरे ने की थी धोनी की खोज 

इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने से पहले धोनी (MS Dhoni) घरेलू क्रिकेट के एक शानदार खिलाड़ी के रूप में अपनी जगह बना चुके थे. लेकिन राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) जैसे दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज के टीम में पहले से ही मौजूद होने के चलते उनकी भारतीय टीम में एंट्री काफी कठिन थी. मोरे (Kiran More) ने एक यूट्यूब चैनल पर बातचीत करते हुए कहा, ‘उस समय हमें एक पावर हिटर की जरूरत थी जो 6 या 7 नंबर पर आकर तेजी से 40-50 रन ठोक सके. राहुल द्रविड़ पहले से टीम में विकेटकीपिंग कर रहे थे और 75 मैच विकेटकीपर को तौर पर खेल चुके थे. इसी वजह से हमें एक विकेटकीपर की  जोर-शोर से तलाश थी.’       

गांगुली से हो गई थी बहस 

बता दें कि 2004 दलीप ट्रॉफी के फाइनल में धोनी (MS Dhoni) के खेलने के लिए गांगुली और मोरे के बीच में एक बड़ी बहस हो गई थी. गांगुली (Sourav Ganguly) चाहते थे कि ईस्ट जोन की ओर से दीपदास गुप्ता कीपर बनकर मैदान में उतरें, जबकि मोरे (Kiran More) धोनी को टीम में जगह देना चाहते थे. मोरे ने कहा, ‘मेरे एक सहयोगी ने पहले धोनी को खेलते हुए देखा था और उसके बाद मैंने खुद उन्हें जाकर देखा. धोनी ने उस मैच में 170 में से कुल 130 रन ठोके थे. मैं चाहता था कि फाइनल में बतौर विकेटकीपर धोनी ही खेलें. जिसके बाद गांगुली से मेरी काफी बहस हुई. फिर मुझे सौरव को धोनी के कीपिंग करने देने के लिए समझाने में 10 दिन लग गए थे.’

धोनी बने सबसे सफल कप्तान 

बाद में 2007 में पहली बार टीम इंडिया की कप्तानी मिलने पर धोनी (MS Dhoni) ने कई कमाल किए. सबसे पहले 2007 में धोनी की कप्तानी में ही भारत ने पहला टी20 वर्ल्ड कप जीता. इसके बाद 2011 में भारत 50 ओवर वर्ल्ड कप का विजेता बना. इतना ही नहीं धोनी की ही कप्तानी में भारत ने 2013 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब भी जीता. हालांकि पिछले साल धोनी ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी.