
ग्रामीण विकास मंत्रालय

अधिकार प्राप्त समिति ने महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के विकास में तेजी लाने के प्रस्तावों की समीक्षा की
प्रविष्टि तिथि: 22 AUG 2026 9:53AM by PIB Delhi
श्री रोहित कंसल, सचिव (ग्रामीण विकास) की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिकार प्राप्त समिति ने आज महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने और उनका विस्तार करने तथा लघु स्वयं सहायता समूह उद्यमों को उच्च स्तरीय, विकासोन्मुखी व्यवसायों में परिवर्तित होने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए डीएवाई-एनआरएलएम के गैर-कृषि आजीविका (एनएफएल) घटक के अंतर्गत प्रस्तावों पर विचार किया ।
इस बैठक में संयुक्त सचिव (ग्रामीण आजीविका) श्री अमित शुक्ला और संयुक्त सचिव (ग्रामीण आजीविका) सुश्री स्वाति शर्मा भी उपस्थित थे। चर्चा का मुख्य विषय ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता आधारित आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना और 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देना था।
समिति ने बिहार, जम्मू और कश्मीर, उत्तर प्रदेश और गुजरात से चार नए इनक्यूबेटर प्रस्तावों पर विचार किया, जिनमें क्रमशः आईआईटी पटना, आईआईएम जम्मू, आईआईएम लखनऊ और आईआईटी गांधीनगर को प्रस्तावित इनक्यूबेटर भागीदार के रूप में शामिल किया गया है। ये प्रस्ताव संबंधित राज्यों के प्रधान सचिवों/सचिवों, राज्य मिशन निदेशकों/एसआरएलएम के सीईओ और प्रस्तावित इनक्यूबेटर संस्थानों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए गए। इन चारों कार्यक्रमों के माध्यम से व्यावसायिक रणनीति, मार्गदर्शन, वित्तीय योजना, औपचारिकीकरण, प्रौद्योगिकी अपनाने, बाजार पहुंच और वित्त तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में व्यवस्थित उपायों द्वारा 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है।
इन्क्यूबेटर उप-योजना असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में सफलतापूर्वक संपन्न हुए चार इन्क्यूबेटर कार्यक्रमों के अनुभव पर आधारित है, जिन्होंने 600 से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों को सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का तब से काफी विस्तार हुआ है और वर्तमान में 13 राज्यों में 14 इन्क्यूबेटर कार्यक्रम चल रहे हैं, जो आईआईएम, आईआईटी और प्रमुख इन्क्यूबेशन संस्थानों सहित प्रमुख व्यावसायिक और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से लगभग 2,100 ग्रामीण स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) उद्यमों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं। पूर्व के कार्यक्रमों ने राजस्व वृद्धि, व्यवसाय के औपचारिकरण में सुधार और अतिरिक्त रोजगार सृजन सहित ठोस परिणाम प्रदर्शित किए हैं।
नए इनक्यूबेटर खाद्य एवं कृषि-प्रसंस्करण, वस्त्र एवं हस्तशिल्प, विनिर्माण, खुदरा एवं सेवाएं, पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां, डिजिटल उद्यम और अन्य स्थानीय रूप से प्रासंगिक विकास क्षेत्रों पर ध्यान देंगे। एक प्रमुख विशेषता यह है कि मजबूत विकास क्षमता वाले उद्यमों के चयन के लिए एक पारदर्शी, योग्यता-आधारित चुनौती कोष स्थापित किया गया है, साथ ही राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के अंतर्गत उद्यम समर्थन को संस्थागत रूप देने के लिए समर्पित राज्य इनक्यूबेशन सेल भी स्थापित किए गए हैं।
समिति ने पश्चिम बंगाल और गोवा में स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी) के विस्तार के प्रस्तावों पर भी विचार किया जिसका उद्देश्य ग्रामीण गैर-कृषि उद्यमिता तंत्र को और मजबूत करना और अधिक स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को टिकाऊ उद्यम स्थापित करने और विकसित करने में सक्षम बनाना है।
ये पहलें महिला नेतृत्व वाले आर्थिक विकास और लखपति दीदी पहल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करती हैं, जिससे ग्रामीण महिला उद्यमियों को निर्वाह स्तर के व्यवसायों से उच्च कारोबार, मजबूत बाजार संबंधों, वित्त तक बेहतर पहुंच और अधिक रोजगार क्षमता वाले उद्यमों की ओर बढ़ने में मदद मिलती है।
अधिकार प्राप्त समिति ने नवाचार, संस्थागत साझेदारी, प्रसार, डिजिटल अपनाने, बाजार पहुंच और परिणाम-आधारित निगरानी पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य डीएवाई-एनआरएलएम के तहत महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के संवर्धन और सतत विकास के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय तंत्र का निर्माण करना था।
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पीके/केसी/पीपी/एनके
(रिलीज़ आईडी: 2302343) आगंतुक पटल : 7

