
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित टकराव की चर्चाओं के बीच ईरान से एक अलग तरह की खबर सामने आई है. जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के रिश्तों को लेकर पूरी दुनिया में हर स्तर पर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने रमजान के महीने में जरूरतमंद कैदियों की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने आर्थिक तंगी की वजह से जेल में बंद कैदियों की रिहाई के लिए 50 अरब रियाल दान किए हैं. इस फैसले को सामाजिक और धार्मिक दोनों नजरियों से अहम माना जा रहा है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) के अनुसार, यह दान रमजान के दौरान आयोजित सलाना कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करना है.
रमजान में हर साल चलाया जाता है यह अभियान
ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में रमजान के दौरान हर साल चैरिटी अभियान चलाया जाता है. इस कार्यक्रम में सरकारी अधिकारी, व्यापारी और आम नागरिक मिलकर फंड इकट्ठा करते हैं ताकि उन कैदियों को आज़ादी मिल सके जो केवल आर्थिक मामलों में फंसे हुए हैं. इस साल सबसे बड़ा योगदान खुद सुप्रीम लीडर की ओर से आया, जिसने इस अभियान को नई चर्चा में ला दिया है.
दान और रहमत का महीना
रमजान को इस्लाम में दया, सब्र और मदद का महीना माना जाता है. मुसलमान रोजा रखते हैं, इबादत करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता को सबसे बड़ा पुण्य समझते हैं. इसी भावना के तहत कैदियों की रिहाई का यह अभियान आयोजित किया जाता है ताकि टूटे हुए परिवार फिर से एक साथ आ सकें.
सैकड़ों परिवारों को मिलेगी राहत
सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस दान से बड़ी संख्या में कैदियों की रिहाई संभव होगी. कई ऐसे परिवार, जो सालों से अपने प्रियजनों के लौटने का इंतजार कर रहे थे, अब राहत की सांस ले सकेंगे. इसे समाज में दूसरा मौका देने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है.
अमेरिका सिर पर जंग के लिए मंडरा रहा
खामनेई ने ऐसे हालात में ये दान किया है, जब ट्रंप प्रशासन ने मिडिल ईस्ट में दो एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और हजारों सैनिक तैनात कर दिए हैं. परमाणु वार्ता फेल होने पर हमले की आशंका है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है. विशेषज्ञ कहते हैं कि युद्ध हफ्तों चल सकता है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी.
