Bulgaria Euro News Latest Updates: नए साल 2026 के आगमन के साथ ही यूरोप में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. बुल्गारिया ने आज यानी 1 जनवरी 2026 से अपनी राष्ट्रीय मुद्रा बुल्गारियन लेव को छोड़कर यूरो को कानूनी मुद्रा के रूप में अपनाने का ऐलान किया है. ऐसा करने वाला वह यूरोप का 21वां देश बन गया है. उसका यह कदम यूरोपीय संघ के साथ उसके एकीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. साथ ही इससे देश में बेरोजगारी और गरीबी के भी कम होने के आसार जताए जा रहे हैं.

1 फरवरी से नहीं चलेगी स्थानीय मुद्रा

बुल्गारिया सरकार की घोषणा के मुताबिक, देश में बेशक 1 जनवरी से अब यूरो आधिकारिक मुद्रा बन गई है. लेकिन इस पूरे महीने लेव भी वैध मुद्रा बनी रहेगी. हालांकि 1 फरवरी से यह छूट खत्म हो जाएगी. उसके बाद  केवल यूरो ही देश की आधिकारिक मुद्रा होगा. जबकि दुकानों और लेन-देन में लेव और यूरो दोनों में मूल्य दिखाने की व्यवस्था अगस्त 2026 तक जारी रहेगी.

Add Zee News as a Preferred Source

यूरो अपनाने वाले मुल्कों की बढ़ी संख्या

बताते चलें कि यूरोपीय संघ में पहले 28 देश थे. ब्रिटेन के बाहर होने के बाद अब संघ में 27 देश बचे हैं. जिनमें से 20 देश पहले ही यूरो को अपनी साझी और कानूनी मुद्रा के रूप में स्वीकार कर चुके थे. जबकि 7 देश चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया और स्वीडन अब तक अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल कर रहे थे. अब बुल्गारिया के भी यूरो अपनाने के साथ साझी मुद्रा का इस्तेमाल करने वाले देशों की संख्या 21 हो गई है. 

यूरो को लेकर दो हिस्सों में बंटा मुल्क 

बुल्गारिया ने भले ही यह फैसला कर लिया हो लेकिन उसके लिए भी ऐसा करना आसान नहीं रहा है. देश की स्थानीय करंसी छोड़कर यूरो अपनाई जाए या नहीं, इस मुद्दे पर मुल्क की जनता बंटी हई है. देश में करीब 46.8% लोग यूरो अपनाने के खिलाफ हैं, वहीं लगभग 46.5% इसके पक्ष में हैं.

इस फैसले के विरोधियों का कहना है कि यूरो अपनाने से राष्ट्रीय पहचान कमजोर होगी. ऐसा करने से बुल्गारिया को खास फायदा नहीं होगा और वह यूरोपीय संघ के हाशिये पर रह जाएगा. जिससे वह और आर्थिक संकट में फंस जाएगा. वहीं यूरो समर्थकों का मानना है कि इस फैसले से उनका देश अमीर मुल्कों के क्लब में शामिल हो जाएगा. जिससे लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा.

‘पुतिन के घर पर हमला’ कहीं रूस का फाल्स फ्लैग ऑपरेशन तो नहीं? CIA के खुलासे से हिला क्यों हिल गया पूरा नैरेटिव

राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा बुल्गारिया

बताते चलें कि करीब 64 लाख की आबादी वाला बुल्गारिया यूरोप का सबसे गरीब और भ्रष्ट देशों में गिना जाता है. यह मुल्क लंबे वक्त से राजनीतिक अस्थिरता का भी शिकार रहा है. जिससे इसकी आर्थिक स्थिति और भी डावांडोल हुई है. वर्ष 2021 के बाद से वहां पर अब तक 7  संसदीय चुनाव हो चुके हैं. पिछले महीने 11 दिसंबर को प्रधानमंत्री रोसेन झेल्याज़कोव ने भी भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ हुए जन-प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया.