
Turkey Birth Rate Fall: पाकिस्तान का करीबी मित्र तुर्किए इन दिनों एक बड़ी समस्या से जूझ रहा है. यहां चीन-जापान की तरह ही डेमोग्राफिक टर्निंग पॉइंट यानी जनसांख्यिकीय संकट देखने को मिला है. तुर्किए की आबादी बढ़ने के बदले अब तेजी से घट रही है. यह देश इस स्थिति से जूझने वाला इकलौता मुस्लिम देश बन चुका है. ताजा आकंड़ों के मुताबिक तुर्किए में साल 2024 में प्रजनन दर (Fertility Rate) गिरकर मात्र 1.48 रह गई, जो आबादी को स्थिर रखने के लिहाज से बेहद निचले स्तर पर है. साल 2017 में यहां का प्रजनन दर 2.08 था.
प्रजनन दर में बड़ी गिरावट
तुर्किए के प्रजनन दर पिछले 25 सालों में यह सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस गंभीर खतरे को खतरे को देखते हुए वहां के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इसे मुल्क के अस्तित्व के लिए बड़ा संकट और तबाही बताया है. बता दें कि तुर्किए में गहरे आर्थिक और सामाजिक कारणों के चलते जन्म दर घट रहा है. यहां लोग पहले से ही बढ़ती महंगाई, नौकरी, घर खरीदने की भारी लागत के चलते अपना परिवार बढ़ाने से कतरा रहे है. इसके अलावा यहां महिलाएं परिवार से ज्यादा करियर और पढ़ाई पर फोकस कर रही हैं, जिससे शहरों में रहने वाले परिवार अब 1-2 बच्चों तक ही सीमित हैं.
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तुर्किए में बढ़ी बूढ़ों की संख्या
घटते जन्मदर के चलते तुर्किए अब पिछले 10 सालों में विश्व के उन टॉप 5 देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जहां जन्म दर सबसे तेजी से गिरी है. भले ही यहां की आबादी 8.6 करोड़ से अधिक है, लेकिन यहां बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. मौजूदा समय में तुर्किए की आबादी में 65 साल से ऊपर लोगों की 10.6 फीसदी हिस्सेदारी है. अनुमान है कि साल 2025 में यहां हर चौथा व्यक्ति बुजुर्ग होगा. तुर्किए में सरकार को डर है कि अगर युवाओं की आबादी कम हुई तो देश में स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ेगा.
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सरकार दे रही लालच
तुर्किए में घटते जन्म दर के खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रपति राष्ट्रपति एर्दोगन ने साल 2026-2035 को ‘परिवार और जनसंख्या दशक’ ऐलान किया है. सरकार ने देश में जनसंख्या बढ़ाने के लिए पहले बच्चे पर 5,000 लीरा ( 1,055.03 भारतीय रुपये) का पेमेंट और नवविवाहितों को 1.5 लाख लीरा ( 1,53,315 भारतीय रुपये) तक का इंटरेस्ट फ्री लोन देने की घोषणा की है. एर्दोगन भी लंबे समय से अपने देश के हर परिवारों अपील कर रहे हैं कि वे कम से कम 3 बच्चे पैदा करें, हालांकि आर्थिक दबाव के चलते उनकी ये योजनाएं नाकाम साबित हो रही हैं. तुर्किए अब चीन-जापान जैसी समस्या की तरफ बढ़ने लगा है. ये देश पिछले कई सालों से जन्म दर पर संघर्ष कर रहे हैं.
