US-Iran Tensions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते को लेकर 10 से 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस अवधि के भीतर अमेरिका के साथ समझौता नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि या तो हमें समझौता मिल जाएगा, या फिर उनके लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा… 10-15 दिन का समय पर्याप्त होगा.

ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे: ट्रंप

ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि बातचीत विफल होती है तो वाशिंगटन का रुख और अधिक आक्रामक हो सकता है. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान हमारे साथ उस रास्ते पर चले जो हमारे कार्यों को पूरा करेगा. अगर वे हमारे साथ जुड़ते हैं तो यह अच्छा होगा, अगर नहीं जुड़ते तो भी एक अलग रास्ता होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि तेहरान पूरे क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डालना बंद करे और अपने परमाणु कार्यक्रम, विशेष रूप से यूरेनियम संवर्धन को रोकने पर सहमति दे.

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पश्चिम एशिया में शुरू हुआ सैन्य जमावड़ा

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पश्चिम एशिया में वायु और नौसेना बलों की बड़ी तैनाती की है, जिसे 2003 में ईराक पर अमेरिकी आक्रमण के बाद से सबसे महत्वपूर्ण सैन्य जमावड़ा माना जा रहा है. सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी सेना संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है, हालांकि अंतिम निर्णय अभी राष्ट्रपति स्तर पर लंबित है.

दी न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी केंद्रीय कमान ने क्षेत्र में दर्जनों ईंधन टैंकर, 50 से अधिक अतिरिक्त लड़ाकू जेट और दो विमानवाहक पोत स्ट्राइक समूह तैनात किए हैं. इनमें विध्वंसक, क्रूजर और पनडुब्बियां भी शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford जिब्राल्टर के पास पहुंच रहा है और क्षेत्र में पहले से मौजूद USS Abraham Lincoln से जुड़ने वाला है. बता दें कि पिछले एक महीने में अमेरिका ने क्षेत्र में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) जैसी उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियां भी तैनात की हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम हैं. 

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तेहरान-मॉस्को ने शुरू किया सैन्य अभ्यास

इस बीच आपको बता दें कि ईरान और रूस ने संयुक्त सैन्य अभ्यास कर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है. इस युद्धाभ्यास में नौसेना और वायुसेना की भागीदारी रही, जहां दोनों देशों ने समन्वित ऑपरेशन, मिसाइल रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े अभ्यास किए. यह कदम पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और अमेरिका के बढ़ते दबाव के जवाब में उठाया गया है. जानकारों का मानना है कि आने वाले 10 दिनों में कूटनीतिक या सैन्य स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं.