US-Iran Nuclear Talks: जेनेवा में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संभावित अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते को लेकर अपना सख्त रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि यदि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई समझौता होता है तो उसमें ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करना शामिल होना चाहिए न कि केवल यूरेनियम संवर्धन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकना. रविवार को अमेरिका के प्रमुख यहूदी संगठनों के अध्यक्षों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से इस मुद्दे पर चर्चा की थी.

 संवर्धन प्रक्रिया को रोकना पर्याप्त नहीं: नेतन्याहू 

 नेतन्याहू के अनुसार, किसी भी संभावित समझौते में संवर्धन की कोई क्षमता नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल संवर्धन प्रक्रिया को रोकना पर्याप्त नहीं है. उन उपकरणों और बुनियादी ढांचे को नष्ट किया जाना चाहिए जो संवर्धन को संभव बनाते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें प्रस्तावित समझौते की प्रभावशीलता पर संदेह है, लेकिन यदि कोई समझौता होता है तो उसमें ईरान की समृद्ध परमाणु सामग्री को देश से बाहर ले जाने का प्रावधान होना चाहिए.

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बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का दूसरा दौर इस हफ्ते प्रस्तावित है. इससे पहले दोनों देशों ने इस महीने की शुरुआत में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दशकों पुराने विवाद को सुलझाने और संभावित सैन्य टकराव को टालने के उद्देश्य से बातचीत फिर से शुरू की थी. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ट्रंप प्रशासन ने क्षेत्र में दूसरा विमानवाहक पोत तैनात किया है. अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो दीर्घकालिक सैन्य अभियान की संभावना को ध्यान में रखते हुए तैयारियां की जा रही हैं. इस कदम को वार्ता के साथ दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.

अपनी नीतियों को लेकर ईरान भी पड़ा नरम

दूसरी ओर, ईरान ने भी सुलह के संकेत दिए हैं. एक ईरानी राजनयिक के अनुसार, तेहरान अमेरिका के साथ ऐसा परमाणु समझौता चाहता है जो दोनों देशों को आर्थिक लाभ प्रदान करे. ईरान की फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के आर्थिक कूटनीति के उपनिदेशक हामिद घनबरी ने कहा कि किसी भी समझौते की स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि अमेरिका को भी त्वरित और उच्च आर्थिक लाभ प्राप्त हो.

घनबरी ने तेल और गैस क्षेत्रों में साझा हितों, संयुक्त ऊर्जा परियोजनाओं, खनन निवेश और यहां तक कि विमान खरीद जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया, जिन्हें संभावित वार्ता के एजेंडे में शामिल किया जा सकता है. सूत्रों का मानना है कि आर्थिक प्रोत्साहनों के जरिए ईरान प्रतिबंधों में राहत और विदेशी निवेश को आकर्षित करना चाहता है. हालांकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ईरान के भीतर राजनीतिक असंतोष भी बढ़ता दिख रहा है. 

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ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने तेहरान में मौजूदा शासन के खिलाफ दुनिया के प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों का आह्वान किया है. उन्होंने सर्वोच्च नेता  खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए हालिया आर्थिक संकट और विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई को मुद्दा बनाया. म्यूनिख में आयोजित एक प्रदर्शन में लगभग ढाई लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है. प्रदर्शनकारियों ने ईरान में राजनीतिक बदलाव और आर्थिक सुधारों की मांग की है.