
America-Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच इन दिनों तनाव बना हुआ है. वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर तेहरान में हमला करने की बात भी कह चुके हैं. यहां तक कि खाड़ी देशों में अमेरिका के कई विमान भी तैनात हो चुके हैं. अब ट्रंप ने शुक्रवार 20 फरवरी 2026 को कहा कि अगर ईरान, अमेरिका के साथ परमाणु समझौता नहीं करता है तो वह उस पर सीमित हमला करने पर विचार कर सकता है. राष्ट्रपति का यह बयान उस अल्टीमेटम के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने इस्लामी राष्ट्र को 10 दिनों के अंदर उपयोगी समझौता करने या भीषण परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी.
ईरान पर स्ट्राइक करेगा अमेरिका?
‘AFP’की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह ईरान के समझौता न करने की स्थिति में लिमिटेड मिलिट्री स्ट्राइक करने पर विचार कर रहे हैं तो इसपर उन्होंने जवाब देते हुआ कहा,’मैं बस इतना ही कह सकता हूं मैं इस पर विचार कर रहा हूं.’ इससे एक दिन पहले ट्रंप ने पीस बोर्ड के कार्यक्रम में बोलते हुए था,’ जैसा कि आप जानते हैं अच्छी बातचीत हो रही है. सालों से यह साबित हो चुका है कि ईरान के साथ कोई सार्थक समझौता करना आसान नहीं है. हमें एक सार्थक समझौता करना ही होगा नहीं तो बुरी चीजें होंगी.’ उन्होंने आगे कहा,’ तो अब हमें एक कदम और आगे बढ़ाना पड़ सकता है या नहीं भी. हो सकता है हम कोई समझौता कर लें. आपको शायद अगले 10 दिनों में पता चल जाएगा.’
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अमेरिका ने की जंग की तैयारी?
ट्रंप की ये टिप्पणियां वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के समय आई हैं. ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने खाड़ी देशों में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है और वहां कई एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और डिफेंस सिस्टम्स भेजे हैं. वहीं ‘रॉयटर्स’ की ओर से स्टडी की गई सेटेलाइट फोटोज से पता चलता है कि ईरान ने भी अपनी कई प्रमुख परमाणु और मिसाइल संबंधी सुविधाओं को मजबूत किया है, सुरंगों के एंट्री गेट्स को मजबूत किया है और सेंसिटिव जगहों पर सुरक्षा बढ़ा दी है. बता दें कि तेहरान ने न्यूक्लियर वेपन बनाने के अपने प्रयासों से बार-बार इनकार किया है.
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तनाव में ईरान-अमेरिका के रिश्ते
ईरान और अमेरिका के बीच सालों से चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बाद अब समझौते की कोशिश चल रही है. अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अमेरिका को 2015 के न्यूक्लियर डील से बाहर निकाल लिया था, जिसके बाद से वह और भी अधिक मजबूत और सख्त समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं. पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में पुराने समझौते को बहाल करने के प्रयास भी आखिरी समझौते तक नहीं पहुंच सके.
