
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

उद्योग-अनुरूप कौशल विकास और शिक्षुता प्रोत्साहन
प्रविष्टि तिथि: 05 AUG 2026 4:15PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने देश भर में प्रशिक्षु प्रशिक्षण को बढ़ावा देने और प्रशिक्षुओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से अगस्त 2016 में राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) शुरू की थी। वर्ष 2022-23 से यह योजना एनएपीएस-2 के रूप में जारी है।
शिक्षुता प्रशिक्षण वास्तविक कार्य वातावरण में आयोजित किया जाता है, जिसमें प्रौद्योगिकी कंपनियों सहित भाग लेने वाले प्रतिष्ठानों के पास उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे व्यावहारिक शिक्षा और उद्योग का अनुभव प्राप्त होता है।
उद्योगों और प्रौद्योगिकी आधारित कंपनियों के साथ सहयोग को मजबूत करने के लिए, शिक्षु अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत भागीदार प्रतिष्ठानों के माध्यम से प्रशिक्षुता प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। यह योजना राष्ट्रीय प्रशिक्षुता पोर्टल (www.apprenticeshipindia.gov.in) के माध्यम से उद्योग-नेतृत्व वाले, ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण को सुगम बनाती है, साथ ही क्षेत्रीय कौशल विकास और उद्यमिता निदेशालयों (आरडीएसडीई), राज्य प्रशिक्षुता सलाहकारों (एसएए) और सूचीबद्ध तृतीय पक्ष एग्रीगेटरों (टीपीए) से भी सहायता प्राप्त करती है।
देश भर में उद्योग-अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से, एमएसडीई द्वारा निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है जो तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करती है।
- एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडीज से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार पहचाने गए व्यवसायों के साथ मैप करें और उद्योग से मान्यता प्राप्त करें।
- संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के अग्रणियों के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदें (एसएससी) स्थापित की गई हैं, जो संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करती हैं।
- एमएसडीई के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना और दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य आईटीआई के छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करना है।
- पीएमकेवीवाई के तहत, नए युग/भविष्य के कौशल से संबंधित जॉब रोल्स को विशेष रूप से उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के अनुरूप खासकर एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में, आगामी बाजार मांग और उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
- डीजीटी ने सीटीएस के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क तकनीशियन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
- राज्य और क्षेत्रीय स्तरों पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, एडब्ल्यूएस आदि जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 मुख्यधारा की शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा के अधिक एकीकरण की परिकल्पना करती है और शैक्षणिक व व्यावसायिक मार्गों के बीच निर्बाध गतिशीलता को बढ़ावा देती है। इस दृष्टिकोण के अनुरूप, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सहयोग से विकसित शिक्षुता-युक्त डिग्री कार्यक्रम, डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों में नामांकित छात्रों को उनके पाठ्यक्रम के एक अभिन्न अंग के रूप में शिक्षुता प्रशिक्षण लेने में सक्षम बनाता है। यह कार्यक्रम रोजगार क्षमता को बढ़ाता है, परिणाम-आधारित अधिगम को बढ़ावा देता है, उद्योग-अकादमिक संबंधों को सुदृढ़ करता है और उद्योग-प्रासंगिक कौशल हासिल करने की सुविधा प्रदान करता है।
- कौशल मेले और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) का आयोजन प्रमाणित उम्मीदवारों को रोजगार और शिक्षुता के अवसर प्रदान करने के लिए किया जाता है।
एनएपीएस के तहत शिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने कई उपाय किए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- देश भर में एनएपीएस-2 का कार्यान्वयन, जिसमें पात्र प्रशिक्षुओं को आंशिक वजीफा सहायता प्रदान की जाएगी।
- प्रशिक्षुओं के बैंक खातों में सरकारी वजीफा सहायता की राशि सीधे जमा करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना शुरू की गई है।
- राष्ट्रीय शिक्षुता पोर्टल के माध्यम से शिक्षुता प्रक्रियाओं का सरलीकरण और डिजिटलीकरण।
- तृतीय पक्ष एग्रीगेटरों (टीपीए) के माध्यम से शिक्षुता कार्यक्रमों में भागीदारी को सुगम बनाना।
- युवाओं को संगठित करने और उद्योग जगत की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेलों (पीएमएनएएम) का आयोजन।
- निर्धारित और वैकल्पिक ट्रेडों में शिक्षुता के अवसरों का विस्तार।
- शिक्षुता को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों, लघु एवं मध्यम उद्यमों और अन्य हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना।
एनएपीएस-2 के तहत, भारत सरकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था के माध्यम से पात्र प्रशिक्षुओं को वजीफा सहायता प्रदान करती है। सरकार का हिस्सा प्रतिष्ठान द्वारा भुगतान किए गए वजीफे के 25% तक सीमित है, जो प्रशिक्षुता प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रति प्रशिक्षु प्रति माह अधिकतम 1,500 रुपए तक सीमित है। वजीफा सहायता सीधे राष्ट्रीय प्रशिक्षुता पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षुओं के बैंक खातों में जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है।
एनएपीएस-2 के अंतर्गत पूरे देश में डीबीटी के माध्यम से संवितरित वजीफा राशि में सरकार के हिस्से का ब्यौरा अनुलग्नक की तालिका-I में दिया गया है।
शिक्षुता प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षुता के अवसरों का विस्तार करने के लिए, राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना विनिर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, खाद्य प्रसंस्करण, खुदरा, हेल्थकेयर, पर्यटन और आतिथ्य, आईटी-आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सेवा क्षेत्रों जैसे विविध क्षेत्रों में महिलाओं सहित प्रशिक्षुओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
सरकार नियमित रूप से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) का आयोजन देश भर में करती है, जिसमें प्रत्येक राज्य के एक तिहाई जिलों में हर महीने युवाओं, विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों को शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा, राज्यों, क्षेत्रीय कौशल विकास और उद्यमिता के निदेशालयों (आरडीएसडीई), राज्य शिक्षुता सलाहकारों (एसएए), उद्योगों और तृतीय-पक्ष एग्रीगेटरों (टीपीए) के साथ हितधारकों की बैठकों के दौरान, सभी क्षेत्रों में महिला शिक्षुता की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाता है।
शिक्षुता के अवसरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए, शिक्षु अधिनियम, 1961 में वर्ष 2014 में संशोधन किया गया ताकि वैकल्पिक ट्रेडों को शामिल किया जा सके, जिससे उद्योगों को अपनी विशिष्ट कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षुता कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिल सके।
यह योजना महिला प्रशिक्षुओं सहित सभी प्रशिक्षुओं के लिए सुरक्षित, समावेशी और अनुकूल प्रशिक्षण वातावरण को बढ़ावा देती है। प्रशिक्षु अधिनियम, 1961 की धारा 14 के तहत, प्रशिक्षुओं को कारखाना अधिनियम, 1948 और खान अधिनियम, 1952 के तहत कामगारों पर लागू होने वाले संबंधित सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण प्रावधानों के अंतर्गत रखा गया है। परिणामस्वरूप, प्रशिक्षु नियमित कर्मचारियों के समान कार्यस्थल सुरक्षा उपायों, कल्याण सुविधाओं और सुरक्षात्मक प्रावधानों के हकदार हैं। इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षु कार्यस्थल पर महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पीओएसएच अधिनियम) के अंतर्गत भी आते हैं। साथ ही, शिक्षु अधिनियम, 1961 की धारा 15 कार्य घंटों और अवकाश प्रावधानों को विनियमित करती है। 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के प्रशिक्षुओं को प्रतिष्ठान के सामान्य कार्य घंटों के दौरान प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि 18 वर्ष से कम आयु के प्रशिक्षुओं के लिए कार्य घंटे आमतौर पर सुबह 8:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच सीमित होते हैं, सिवाय उन मामलों के जहां संबंधित प्रशिक्षुता सलाहकार द्वारा विशेष रूप से अनुमति दी गई हो।
पिछले कुछ वर्षों में शिक्षुता प्रशिक्षण में महिलाओं की सहभागिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल शिक्षुता में महिला प्रशिक्षुओं की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016-17 में 7.74% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24.95% हो गई है, जो एनएपीएस के तहत नीतिगत हस्तक्षेपों के सकारात्मक प्रभाव और सेवा क्षेत्र के ट्रेडों में शिक्षुता के अवसरों के विस्तार को दर्शाती है।
अनुलग्नक
तालिका-I एनएपीएस-2 के तहत डीबीटी के माध्यम से देश भर में संवितरित वजीफा राशि में सरकार के हिस्से का ब्यौरा नीचे दिया गया है। (करोड़ रुपये में)
# | राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | 2023-24 | 2024-25 | 2025-26 | 2026-27 | कुल |
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह | 0.03 | 0.05 | 0.03 | 0.01 | 0.12 | |
आंध्र प्रदेश | 11.35 | 18.32 | 21.97 | 7.57 | 59.21 | |
अरुणाचल प्रदेश | 0.14 | 0.24 | 0.37 | 0.07 | 0.82 | |
असम | 4.81 | 5.05 | 10.31 | 2.28 | 22.45 | |
बिहार | 15.59 | 24.48 | 26.74 | 9.03 | 75.84 | |
चंडीगढ़ | 0.24 | 0.33 | 0.41 | 0.16 | 1.14 | |
छत्तीसगढ | 2.8 | 3.87 | 4.45 | 1.49 | 12.61 | |
दिल्ली | 4.47 | 9.14 | 12.19 | 3.91 | 29.71 | |
गोवा | 0.78 | 1.28 | 1.51 | 0.44 | 4.01 | |
गुजरात | 14.34 | 27.31 | 29.24 | 9.6 | 80.49 | |
हरियाणा | 6.98 | 10.62 | 10.64 | 3.55 | 31.79 | |
हिमाचल प्रदेश | 3.43 | 4.61 | 4.65 | 1.67 | 14.36 | |
जम्मू-कश्मीर | 0.4 | 0.8 | 1.02 | 0.28 | 2.5 | |
झारखंड | 8.13 | 13.58 | 14.17 | 4.47 | 40.35 | |
कर्नाटक | 20.11 | 32.9 | 35.08 | 10.69 | 98.78 | |
केरल | 5.93 | 10.77 | 10.64 | 3.19 | 30.53 | |
लद्दाख | 0 | 0 | 0.01 | 0 | 0.01 | |
लक्षद्वीप | 0 | 0.01 | 0.01 | 0 | 0.02 | |
मध्य प्रदेश | 11.99 | 21.49 | 23.98 | 7.28 | 64.74 | |
महाराष्ट्र | 85.32 | 117.35 | 121.5 | 37.07 | 361.24 | |
मणिपुर | 0.28 | 0.61 | 1.56 | 0.29 | 2.74 | |
मेघालय | 0.19 | 0.28 | 1 | 0.22 | 1.69 | |
मिजोरम | 0.13 | 0.19 | 0.67 | 0.13 | 1.12 | |
नगालैंड | 0.12 | 0.29 | 0.58 | 0.11 | 1.1 | |
ओडिशा | 10.73 | 13.45 | 15.94 | 4.75 | 44.87 | |
पुदुचेरी | 0.55 | 1.13 | 1.4 | 0.41 | 3.49 | |
पंजाब | 2.69 | 4.05 | 5.33 | 2.05 | 14.12 | |
राजस्थान | 5.99 | 9.78 | 13.22 | 4.63 | 33.62 | |
सिक्किम | 0.09 | 0.2 | 0.43 | 0.11 | 0.83 | |
तमिलनाडु | 38.05 | 59.49 | 64.47 | 19.43 | 181.44 | |
तेलंगाना | 5.77 | 8.77 | 10.21 | 3.67 | 28.42 | |
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव | 0.27 | 0.56 | 0.72 | 0.24 | 1.79 | |
त्रिपुरा | 0.34 | 0.5 | 0.96 | 0.22 | 2.02 | |
उत्तर प्रदेश | 43.3 | 70.22 | 86.59 | 27.64 | 227.75 | |
उत्तराखंड | 6.2 | 9.01 | 10.51 | 3.71 | 29.43 | |
पश्चिम बंगाल | 15.63 | 19.42 | 24.76 | 8.5 | 68.31 | |
कुल | 327.17 | 500.15 | 567.27 | 178.87 | 1573.46 |
नोट: एनएपीएस-2 के तहत डीबीटी आधारित वजीफा सहायता जुलाई 2023 से शुरू हुई।
कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
पीके/केसी/एसकेएस/केके
(रिलीज़ आईडी: 2294996) आगंतुक पटल : 23

