
उप राष्ट्रपति सचिवालय

उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया, लेह में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में शामिल हुए
उपराष्ट्रपति: योग को दुनिया भर में मिली पहचान मानवता के लिए भारत के निरंतर योगदान को दर्शाती है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हुआयोग करने वाला कोई भी व्यक्ति नशीले पदार्थों या बुरी आदतों का शिकार नहीं होता: उपराष्ट्रपति
जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ रहा है, योग जीवन में नई ऊर्जा और खुशहाली ला सकता है: उपराष्ट्रपति
लद्दाख के लोग शांत, दयालु और किसी भी मुश्किल का सामना करने वाले हैं, वे योग की सच्ची भावना को दर्शाते हैं: उपराष्ट्रपति
प्रविष्टि तिथि: 21 JUN 2026 1:23PM by PIB Delhi
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज लेह, लद्दाख में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में भाग लिया और नागरिकों से एक स्वस्थ, खुशहाल और शांतिपूर्ण समाज के लिए योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan participated in the International Day of Yoga celebrations at Spituk Stadium in Leh, Ladakh.
Lieutenant Governor, UT of Ladakh, Shri Vinai Kumar Saxena; Member of Parliament, Lok Sabha from Ladakh, Shri Mohmad Haneefa ; Chief Executive… pic.twitter.com/0JTQtUjCKM
— Vice-President of India (@VPIndia) June 21, 2026
लद्दाख के बेहद खूबसूरत हिमालयी परिदृश्य के बीच लोगों को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम का एक रूप नहीं है, बल्कि यह मानवता के लिए भारत की ओर से एक प्राचीन उपहार है। उन्होंने कहा कि वर्षों के ध्यान, तपस्या और आध्यात्मिक खोज के माध्यम से, भारत के ऋषियों ने एक ऐसी समग्र प्रणाली विकसित की, जो शरीर को पोषित करती है, मन को शांत करती है और आत्मा को उन्नत करती है।



उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और रफ्तार मिली है। 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके आह्वान पर, 175 से अधिक सदस्य देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था।
इस वर्ष की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” का उल्लेख करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में प्रगति और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि होने से समाज के लिए नई जिम्मेदारियां सामने आई हैं। ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023′ का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि 2050 तक भारत की लगभग एक-पांचवीं आबादी बुजुर्ग होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना ज़रुरी है कि “जीवन में जुड़ने वाले वर्षों का अर्थ, वर्षों में जीवन का जुड़ना भी हो” और उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सक्रिय रूप से उम्र बढ़ने को बढ़ावा देने के लिए योग को एक शक्तिशाली साधन बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ज़्यादा ऊंचाई वाली जगहों पर जीवन जीने के लिए ज्यादा सहनशक्ति, अनुशासन और हालात के अनुसार ढलने की क्षमता की ज़रूरत होती है और योग इन गुणों को विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग लंबे समय से साहस, सादगी और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहने का उदाहरण पेश करते रहे हैं। ये ऐसे मूल्य हैं, जो योग की विचारधारा से गहराई से जुड़े हैं।
लद्दाख के लोगों की तारीफ़ करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस क्षेत्र में लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने पाया कि वे शांत, मिलनसार, दयालु और प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि उनमें पहले से ही स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े कई गुण मौजूद हैं, लेकिन योग का लगातार अभ्यास उनकी ऊर्जा और जीवन-शक्ति को बनाए रखने में मदद करेगा और उन्हें अपनी पूरी मानवीय क्षमता को हासिल करने में सक्षम बनाएगा।
इस मौके पर मौजूद लोगों में लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के उप राज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना, लद्दाख से सांसद (लोकसभा) श्री मोहम्मद हनीफा,एलएएचडीसी कारगिल के मुख्य कार्यकारी पार्षद श्री मोहम्मद जाफ़र अखून, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के मुख्य सचिव श्री आशीष कुंद्रा, वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारी, योग साधक, छात्र और स्थानीय समुदाय के सदस्य शामिल थे।
इससे पहले दिन में, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने लेह के देवाचन कैंपस स्थित महाबोधि अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्र (एमआईएमसी) का दौरा किया। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, समाज कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और योग व ध्यान को बढ़ावा देने में इस संस्थान के शानदार योगदान की काफी सराहना की।



उन्होंने पूज्य भिक्षु संघसेन के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की और कहा कि एमआईएमसी इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है कि मानवता के कल्याण के लिए आध्यात्मिक ज्ञान और मानवीय कार्य किस तरह एक साथ आ सकते हैं।
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पीके/केसी/एनएस
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