
विधि एवं न्याय मंत्रालय

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय बजट 2026 में न्यायिक अवसंरचना और ई- अदालतों के आधुनिकीकरण के लिए 2,010 करोड़ रुपये आवंटित किए गये हैं
प्रविष्टि तिथि: 25 JUL 2026 8:55PM by PIB Delhi
केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के अंतर्गत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना सुविधाओं के विकास हेतु, केंद्रीय बजट 2026 में न्यायिक अवसंरचना के लिए 810 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इसके अतिरिक्त, न्यायालयों के डिजिटलीकरण, आवश्यक प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों सहित, क्रियान्वित किए जा रहे ई-अदालत परियोजना चरण-III के लिए केंद्रीय बजट 2026 में 1200 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इन योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत व्यय तथा निधियों की उपलब्धता के आधार पर पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए जाते हैं। हालाँकि, मामलों का शीघ्र निपटारा अनेक कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें मामले की जटिलता, जांच की गुणवत्ता, प्रासंगिक साक्ष्यों की उपलब्धता तथा अधिवक्ताओं द्वारा उनका प्रभावी प्रस्तुतीकरण, न्यायालयीय प्रक्रियाओं का समय पर निष्पादन, पक्षकारों की सक्रिय भागीदारी, न्यायिक प्रक्रियाएँ आदि शामिल हैं।
राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान तिथि तक राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों तथा न्यायालय कर्मचारियों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों का विवरण निम्नानुसार है:
श्रेणी | स्वीकृत पद संख्या | कार्य शक्ति | रिक्ति |
न्यायाधीश | 50 | 39 | 11 |
न्यायिक अधिकारी | 1722 | 1517 | 205 |
न्यायालय कर्मचारी | 18832 | 11226 | 7606 |
इसके अतिरिक्त, आज की तारीख तक टोंक और सवाई माधोपुर न्याय क्षेत्र के अंतर्गत न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय कर्मचारियों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों का विवरण निम्नानुसार है:
श्रेणी | स्वीकृत पद संख्या | कार्य शक्ति | रिक्ति |
टोंक न्याय क्षेत्र | |||
न्यायिक अधिकारी | 30 | 29 | 01 |
न्यायालय कर्मचारी | 412 | 247 | 165 |
सवाई माधोपुर न्याय क्षेत्र | |||
न्यायिक अधिकारी | 25 | 24 | 01 |
न्यायालय कर्मचारी | 321 | 194 | 127 |
भारत सरकार ने राज्य सरकार और न्यायपालिका के समन्वय से देशभर में, जिसमें टोंक–सवाई माधोपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल है, सुलभ, त्वरित और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए हैं। न्यायालयों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वाद-पूर्व कानूनी सलाह उपलब्ध कराने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से टेली-लॉ सेवाएं उपलब्ध हैं। ई-कोर्ट्स परियोजना के अंतर्गत ई-फाइलिंग, ई-पे, वर्चुअल कोर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड जैसी डिजिटल सेवाएं लागू की गई हैं। विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। विवादों के त्वरित निपटारे के लिए लोक अदालतों और मध्यस्थता सहित वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/जेएस
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