
विधि एवं न्याय मंत्रालय

केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत आंध्र प्रदेश में न्यायिक ढांचा तैयार करने के लिए केन्द्र का समर्थन जारी
प्रविष्टि तिथि: 25 JUL 2026 9:01PM by PIB Delhi
जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए बुनियादी ढांचा सुविधाएं तैयार करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों (यूटी) की होती है। हालांकि, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के संसाधनों को बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार वर्ष 1993-94 से जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायपालिका के लिए बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास हेतु केन्द्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) लागू कर रही है। इस योजना के तहत पांच घटक शामिल हैं, अर्थात न्यायालय कक्ष, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय इकाइयां, अधिवक्ताओं के लिए हॉल, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष। योजना की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए आंध्र प्रदेश राज्य सहित पूरे देश में एक तृतीय-पक्ष एजेंसी द्वारा इसका मूल्यांकन किया जाता है। विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति (डीआरपीएससी) द्वारा भी इस योजना का मूल्यांकन किया जाता है।
सीएसएस के तहत परियोजनाओं की पहचान संबंधित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों और उच्च न्यायालयों द्वारा की जाती है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से विस्तृत मांग प्राप्त होने के बाद, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को धनराशि का अस्थायी आवंटन किया जाता है और उन्हें मदर सैंक्शन जारी की जाती है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सीएसएस के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए मदर सैंक्शन की सीमा के भीतर चिन्हित परियोजनाओं पर व्यय कर सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आंध्र प्रदेश राज्य को 8.79 करोड़ रुपये की मदर सैंक्शन जारी की गई है। इस योजना की समाप्ति तिथि 31.03.2026 थी और इसे अस्थायी रूप से बढ़ाकर 30.09.2026 तक कर दिया गया है।
आंध्र प्रदेश राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, नेल्लोर जिले सहित पूरे आंध्र प्रदेश में वर्तमान में कार्यरत और निर्माणाधीन न्यायालय अवसंरचना का जिलेवार विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।
(ग): सीएसएस के अंतर्गत पिछले पांच वर्षों के दौरान नेल्लोर जिले सहित जिला न्यायालय अवसंरचना के निर्माण के लिए आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा जारी और उपयोग की गई धनराशि का विवरण इस प्रकार है:
क्रम संख्या | वित्त वर्ष | जारी की गई धनराशि (करोड़ रुपये में) |
1 | 2021-22 | 0.00 |
2 | 2022-23 | 22.50 |
3 | 2023-24 | 49.82 |
4 | 2024-25 | 0.99 |
5 | 2025-26 | 30.98 |
कुल योग | 104.29 |
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश के विभिन्न न्यायालयों में न्यायिक पदों की कुल रिक्तियों का जिलेवार विवरण इस प्रकार है (31.05.2026 की स्थिति के अनुसार):
क्रम संख्या | न्यायिक जिले का नाम * | स्वीकृत पदों की संख्या | रिक्त पद |
1. | अनंतपुर | 63 | 15 |
2. | चित्तूर | 80 | 24 |
3. | पूर्वी गोदावरी | 80 | 12 |
4. | गुंटूर | 79 | 4 |
5. | कडप्पा | 49 | 5 |
6. | कृष्णा | 107 | 13 |
7. | कुरनूल | 76 | 19 |
8. | नैल्लौर | 49 | 6 |
9. | प्रकाशम | 50 | 7 |
10. | श्रीकाकुलम | 41 | 8 |
11. | विशाखापत्तनम | 102 | 10 |
12. | विजयनगरम | 32 | 5 |
13. | पश्चिमी गोदावरी | 67 | 9 |
कुल | 875 | 137 |
* जिला न्यायालयों का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र प्रशासनिक/राजस्व क्षेत्राधिकार से भिन्न होता है।
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से पहले शुरू की गई दो बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अभी भी निर्माणाधीन हैं। ये परियोजनाएं हैं: (i) कोनसीमा जिले के रामचंद्रपुरम में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आवास के लिए आवासीय क्वार्टर का निर्माण, और (ii) कुरनूल जिले के अदोनी में छह न्यायालयों के भवन परिसर का निर्माण। योजना के तहत परियोजनाओं की प्रगति के संकलन और निगरानी के लिए न्याय विकास पोर्टल के रूप में एक ऑनलाइन निगरानी तंत्र मौजूद है।
Annexure-I यहां लगा लें
यह जानकारी केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/केपी
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