
Gaya: देश में कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर ने हाहाकार मचा दिया है. वहीं, लोग इस बीमारी से मौत के काल मे समा रहे हैं. इससे पूरे देश में हर तरफ मौत का तांडव देखने को मिल रहा है. वहीं कोरोना (Corona) से बिहार में भी मौत का तांडव देखा जा रहा है. इसको लेकर कफन की भी मांग बढ़ गई है और कफन के अधिक निर्माण के लिए दिन-रात निर्माण किया जा रहा है.
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जानकारी के अनुसार, दक्षिणी बिहार के मैनचेस्टर के रूप में देश और विदेशों में नाम करने वाला मोक्ष की नगरी में स्थापित पटवाटोली के नाम से विख्यात हैं. यहां से हर साल दर्जनों आईआईटीएन निकलते हैं. लेकिन इस कोरोना काल मे यहां की तस्वीरें ही कुछ अलग हो गई है क्योंकि अब यहां मौत का कफन का निर्माण अधिक हो रहा है. वहीं, लोग दिन रात इस कार्य को पूरा करने में लगे हैं ताकि कफन की कमी बाजार में न हो. इसको लेकर इस इलाके के घरों में इस कार्य में मजदूर से लेकर पूरा परिवार इसी काम में लगा हुआ है और राम नाम सत्य है के कफन को तैयार कर रहे हैं. प्रतिदिन 200 से 300 का बंडल कफन की आपूर्ति करा रहे हैं. यह कफन बिहार के पटना जिला और गया जिला सहित अन्य कई जिलों में भेजा जा रहे है और इसकी खपत में तीन गुणा बढ़ोतरी हो गई है.
वहीं, कफन निर्माणकर्ता सतेन्द्र कुमार ने बताया कि यह कार्य हमारे पूर्वजों से चला आ रहा है और वह भी इस काम को सीखकर यही काम कर रहे हैं. यह काम सालों भर चलता है और यहां से ही सारा कफ़न का माल जाता है और गया जिला सहित अन्य कई जिलों में यँहा से कफ़न को भेजा जाता है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना काल मे इसकी माँग तीन गुणा अधिक हो गई है और वे लोग मांग को पूरा करने के लिए दिन रात लगे हुए हैं. लेकिन मांग पूरी नहीं हो रही है क्योंकि प्रतिदिन हजारों की मांग व्यापारियों के द्वारा की जा रही है. वहीं, 100 से 200 पीस ही हर दिन ही पाते है.
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इधर, कफन निर्माणकर्ता सुरेश कुमार ने बताया कि वह इस कार्य मे 25 सालों से जुड़े हैं और अभी कफन की मांग बढ़ गई है. पहले सप्ताह में 500 से 600 की माँग होती थी. लेकिन कोरोना को लेकर 1000 से 1200 हर दिन का मांग हैं. वंही 3 महीने से इसका डिमांड बढ़ गई है और उनका पूरा परिवार दिन-रात मेहनत कर रहे है ताकि मांग को पूरी कर सके. साथ हीं, उन्होंने कहा कि ऐसे ही हालात 10 साल पहले भी हुआ था जब इसकी मांग अचानक बढ़ गई थी. उस वक्त डायरिया का प्रकोप से लोगों की मौत हो रही थी.
(इनपुट- जय प्रकाश कुमार )
