तिब्बत में मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को एक बार फिर धरती कांप उठी. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, सुबह 10 बजकर 17 मिनट 43 सेकंड (भारतीय समय) पर तिब्बत में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी, जिससे झटके सतह पर ज्यादा महसूस किए गए.
NCS ने दी आधिकारिक जानकारी
NCS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “EQ of M: 3.2, On: 03/02/2026 10:17:43 IST, Lat: 28.80 N, Long: 87.30 E, Depth: 10 Km, Location: Tibet.”
इस जानकारी से साफ है कि भूकंप का केंद्र तिब्बत क्षेत्र में था और यह उथली गहराई पर आया. सबसे पहले समझें उथला भूकंप क्या है?.
उथला भूकंप क्या है?
भूकंप पृथ्वी के अंदर कहीं से शुरू होता है, जहां चट्टानें अचानक टूटती या खिसकती हैं. उस जगह को फोकस या हाइपोसेंटर कहते हैं. अब गहराई के हिसाब से भूकंप तीन तरह के होते हैं (USGS और NCS जैसी एजेंसियां यही मानती हैं):
उथला भूकंप → 0 से 70 किलोमीटर तक की गहराई (ज्यादातर 0-30 किमी में आते हैं)
मध्य गहराई वाला → 70 से 300 किलोमीटर
गहरा भूकंप → 300 से 700 किलोमीटर तक
तिब्बत वाला भूकंप 10 किमी पर था. यानी बिल्कुल उथला. ऐसे भूकंप दुनिया में सबसे ज्यादा तबाही मचाते हैं, क्योंकि ज्यादातर बड़े-बड़े विनाशकारी भूकंप इसी कैटेगरी में आते हैं.
क्यों उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक होते हैं?
सोचिए, भूकंप की एनर्जी तरंगों (सिस्मिक वेव्स) के रूप में सतह तक पहुंचती है. अगर फोकस गहरा है, तो तरंगें रास्ते में बहुत सारी चट्टानों से गुजरती हैं. रास्ते में एनर्जी कमजोर पड़ जाती है, फैल जाती है जैसे दूर से चिल्लाने पर आवाज धीमी हो जाती है. लेकिन उथले भूकंप में? तरंगों को सतह तक पहुंचने में बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है. एनर्जी लगभग पूरी-पूरी सतह पर आ जाती है. नतीजा जमीन ज्यादा तेज और जोर से हिलती है. USGS की वैज्ञानिक सुजान हॉफ कहती हैं कि उथला भूकंप “शहर के ठीक नीचे बम फटने” जैसा होता है. उदाहरण से समझें: अगर दो भूकंप एक ही तीव्रता के हों, लेकिन एक 10 किमी गहरा और दूसरा 500 किमी गहरा तो उथला वाला ज्यादा नुकसान करेगा.
उथले भूकंप क्यों होते हैं ज्यादा खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार, उथली गहराई पर आने वाले भूकंप ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. इसकी वजह यह है कि भूकंपीय तरंगों को जमीन की सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे झटके ज्यादा तेज महसूस होते हैं. ऐसे भूकंप इमारतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और जनहानि की आशंका भी बढ़ जाती है.
तिब्बत-नेपाल क्षेत्र क्यों रहता है भूकंप के खतरे में?
तिब्बत और नेपाल एक बड़े भूवैज्ञानिक फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं.यहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट, यूरेशियन प्लेट से टकराती है. इसी टक्कर के कारण हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ और आज भी यह प्रक्रिया जारी है. इसी वजह से इस पूरे क्षेत्र में भूकंप आना आम बात है.
हिमालय की ऊंचाई बढ़ने की भी वजह
भूवैज्ञानिकों का कहना है कि भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से पृथ्वी की परत मोटी होती जा रही है, जिससे तिब्बती पठार की ऊंचाई बनी हुई है. कई बार यह टेक्टोनिक हलचल इतनी मजबूत होती है कि हिमालयी चोटियों की ऊंचाई तक में बदलाव आ सकता है.
पहले भी आ चुके हैं बड़े भूकंप
तिब्बत क्षेत्र में पहले भी कई बड़े भूकंप आ चुके हैं.यहां स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट्स पर 8.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए हैं.वहीं, सामान्य फॉल्टिंग से आने वाले भूकंप अपेक्षाकृत कम तीव्रता के होते हैं, लेकिन फिर भी खतरनाक साबित हो सकते हैं. फिलहाल, इस भूकंप से किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन और वैज्ञानिक एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
