
Reasons for Increase in Gold and Silver Prices: सोने का दाम आसमान पहुंचने के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे सोना आम आदमी की पहुंच से दूर ही हो जाएगा. सोने के दाम बढ़ने का सीधा कनेक्शन स्विटजरलैंड से निकला है. जहां के बंकरों में सोना जमा किया जा रहा है. जो कंपनी सोने का भंडार इकट्ठा कर रही है. उसका सीईओ इन बंकरों को जेम्स बॉन्ड वाला बंकर कहता है. क्या सोने का भंडार जुटाकर स्विटजरलैंड कोई बड़ा खेल करने वाला है या उसको किसी बड़ी खतरे का अंदाजा है. आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सोने के दाम, क्यों अंडरग्राउंड बंकरों में जुटाया जा रहा है लाखों टन सोना.
जेम्स बॉन्ड वाले बंकर से जुड़ी सोने के दाम में तेजी?
पिछले एक साल में ग्लोबल हो या लोकल, हर लेवल पर सोने के दाम दोगुने से ज्यादा बढ़ गए हैं. अभी भी दाम आसमान छू रहे हैं. मानो सोने को पंख लग गए हों. आम लोगों से लेकर इनवेस्टर तक सब हैरान हैं कि आखिर सोने का दाम इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहा है.
अमेरिकी कंपनी ब्लूमबर्ग ने इसके पीछे हैरान करने वाली रिपोर्ट जारी की है. इसमें कहा गया है कि दुनिया भर से सोना खरीदकर स्विटजरलैंड में जमा किया जा रहा है. स्विटजरलैंड में सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान जो बंकर बने थे. अब उनका इस्तेमाल सोना जमा करने के लिए किया जा रहा है.
स्विटजरलैंड में जमा किया जा रहा सोना
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि स्विटजरलैंड के बंकर में सोना जमा किया जा रहा है. बंकर में हर सप्ताह एक टन से ज्यादा सोना पहुंचाया जा रहा है. हाई-सिक्योरिटी वॉल्ट क्रिप्टो वर्ल्ड की दिग्गज कंपनी टेथर होल्डिंग्स SA के कंट्रोल में है.
कंपनी के सीईओ का कहना है कि सोना खरीद का सिलसिला अभी जारी रहेगा. बैंकों और सरकारों को छोड़ दें तो ये दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात निजी गोल्ड भंडार माना जा रहा है. बंकर में रखे करीब 140 टन सोने की कीमत ₹2 लाख करोड़ से भी ज्यादा है.
सोने के बढ़ते दाम के पीछे पहले लोगों को लग रहा था कि युद्ध और दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के गोल्ड खरीदने की वजह से लगातार दाम आसमान छू रहे हैं. हालांकि ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी वजह जानने के लिए एक्सपर्ट परेशान थे. अब अमेरिकी कंपनी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद लोगों के होश उड़ गए हैं.
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि इस कंपनी के पास कई देशों से ज्यादा सोना है. स्विट्ज़रलैंड में करीब 3,70,000 पुराने परमाणु बंकर मौजूद हैं, जो कोल्ड वॉर के दौर के हैं. इनमें से कई बंकरों में हाई सिक्योरिटी वॉल्ट बनाकर सोना जमा किया जा रहा है.
पिछले साल खरीदा करीब 70 टन सोना
ब्लूमबर्ग के अनुमान के मुताबिक, कंपनी ने पिछले वर्ष लगभग 70 टन से अधिक सोना खरीदा. यह मात्रा ज्यादातर केंद्रीय बैंकों से भी ज्यादा है. दुनिया में केवल पोलैंड ऐसा देश रहा जिसने इस कंपनी से अधिक करीब 102 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा. बड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स को छोड़ दिया जाए तो टेथर कंपनी जितनी खरीदारी किसी और प्राइवेट संस्था ने नहीं की.
टेथर कंपनी के सीईओ का कहना है कि वो सोना खरीद जारी रखेंगे. यानी आने वाले दिनों में सोने के दाम में गिरावट आने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि युद्ध और ग्लोबल पॉलिटिक्स में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. इसलिए कंपनी अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहती है. दरअसल ट्रंप के हर दिन पॉलिटिक्स और पॉलिसीज पर बदलते स्टैंड की वजह से बाजार और ग्बोबल रिलेशंस में तेजी से बदलाव आ रहे हैं.
इसलिए टेथर होल्डिंग के साईओ अर्दोइनो का कहना है कि अमेरिका के जियो पॉलिटिकल राइवल फ्यूचर में डॉलर के मुकाबले सोने के सपोर्ट से नई करेंसी पेश कर सकते हैं. इसलिए टेथर अपने भारी मुनाफे का बड़ा हिस्सा लगातार सोने में लगाएगी. अब कंपनी बैंकों की तरह मेटल ट्रेडिंग में भी उतर रही है. कंपनी के सीईओ ने आगे कहा कि हम जल्द ही दुनिया के सबसे बड़े, गोल्ड सेंट्रल बैंक जैसे बनते जा रहे हैं.
पहाड़ों की गहराई में छिपाया गोल्ड
वैसे तो ग्लोबल गोल्ड मार्केट का नेचर काफी सीक्रेटिव होता है. कौन कितना खरीदता और बेचता है इस बात की बमुश्किल ही पुख्ता रिपोर्ट सामने आती है. ऐसे समय में जब युद्ध की और ग्लोबल पॉलिटिक्स अनसर्टेन हो तब तो और ज्यादा गोपनीय खरीददारी होती है. ऐसे में ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि ओरिजिनल डेटा इससे ज्यादा ही हो सकता है.
जिन बंकरों में सोना रखा है, उसे टेथर के सीईओ जेम्स बॉन्ड स्टाइल वाला बंकर कहते हैं. ये बंकर स्विट्जरलैंड की आल्प्स पहाड़ियों के नीचे बने हैं. जो कई फीट मोटे स्टील के अभेद्य दरवाजे, पहाड़ों की गहराई में छिपी सीक्रेट लोकेशन और एडवांस सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी से लैस हैं. इसकी वजह से यह किसी फिल्मी विलेन के हेडक्वार्टर जैसा महसूस कराते हैं. यही कारण है कि दुनिया भर में इस ठिकाने की चर्चा ‘जेम्स बॉन्ड वाले बंकर’ के रूप में हो रही है, जहां पहुंचना नामुमकिन के बराबर है.
एक तरफ अमेरिका की मनमानी से ग्लोबल पॉलिटिक्स नया वर्ल्ड ऑर्डर सेट कर रही है. जिससे हर दिन दुनिया के रिश्ते बदल रहे हैं. नीतियां बदल रही हैं, ग्लोबल पॉलिटिक्स में लोग अमेरिका से दूरी बना रहे हैं. इसलिए जल्द ही कई देश डिडॉलराइजेशन पर भी विचार कर रहे हैं. ब्रिक्स में तो कई बार डॉलर के मुकाबले नई करेंसी की कई बार मांग हो चुकी है. इसलिए टेथर हर रोज तेजी से सोना खरीद रही है. वह दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व बैंक बनने का सपना देख रही है.
ट्रंप की वजह से कीमत और बढ़ने का अंदेशा
कंपनी को अमेरिका और ईरान में तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है. वहीं यूरोपीय देशों से ट्रंप की तनातनी भी सोने-चांदी में निवेश को बढ़ावा दे रही है. डॉलर की कमजोरी भी निवेशकों को गोल्ड पर अधिक भरोसा करने के लिए मजबूर कर रही है, इसलिए इनवेस्टर सॉवरेन बॉन्ड और करेंसी से दूर भाग रहे हैं और गोल्ड में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं.
इसलिए ताजा हालात को देखते हुए लग रहा है कि अभी सोने के दाम राहत नहीं देंगे बल्कि और तेजी से बढ़ेंगे. इसकी वजह ये भी है कि ट्रंप अभी तीन साल और राष्ट्रपति रहेंगे. जिसकी वजह से हो सकता है कि बाजार में अनिश्चितता बनी रहे और इनवेस्टर वित्तीय सुरक्षा के लिए सोना खरीदते रहें.
