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Jaipur : राजधानी जयपुर के ग्रेटर नगर निगम में कथित हाथापाई के मामले में रविवार देर रात राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) ने बड़ी कार्रवाई की. राज्य सरकार ने जयपुर ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर और तीन पार्षदों को तत्काल निलंबित (Soumya Gurjar suspended) कर दिया है. 

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कथित हाथापाई के मामले में क्षेत्रीय उपनिदेशक रेणु खंडेलवाल (Renu Khandelwal) को इस मामले में जांच सौंपी गई थी. उसके बाद जांच अधिकारी रेणु खंडेलवाल ने रविवार शाम डीएलबी को उसकी रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में तीनों पार्षदों को दोषी माना गया है. इन्हें निगम आयुक्त के साथ अभद्र भाषा के प्रयोग, मारपीट, धक्का-मुक्की और राजकार्य में बाधा डालने का पूर्णतया दोषी और उत्तरदायी माना गया है. ऐसे में तीनों पार्षदों को निगम की सदस्यता से निलंबित किया गया है.  

राजस्थान के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी महापौर को निलंबित किया गया है. डीएलबी की ओर से जारी आदेशों में लिखा गया है कि वार्ड 87 की पार्षद और महापौर सौम्या गुर्जर की मौजूदगी में नगर निगम आयुक्त के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल और राजकार्य में बाधा के साथ ही उनकी सहमति से आयुक्त के साथ धक्का-मुक्की की जांच उपनिदेशक क्षेत्रीय, स्थानीय निकाय की ओर से करवाई गई. जांच में सौम्या गुर्जर दोषी पाई गई हैं. इस पर राज्य सरकार ने उनके खिलाफ न्यायिक जांच करने का निर्णय लिया है. उनके महापौर पद पर रहने से जांच प्रभावित होने की पूरी संभावना है, इसलिए राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 39 (6) का प्रयोग करते हुए उन्हें महापौर व सदस्य वार्ड 87 के पद से निलंबित करती है.

मेयर के अलावा वार्ड 72 पार्षद और चेयरमैन पारस जैन, वार्ड 39 पार्षद अजय सिंह चौहान और वार्ड 103 पार्षद शंकर शर्मा को भी निलंबित किया गया है.

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