
Japan Women Parliament Toilet Issue: जापान की संसद में शौचालय की समस्या सामने आई है. ये बात चौंकाने वाली जरूर है, लेकिन सच है. महिलाओं के लिए टॉयलेट की कमी की समस्या को किसी और ने नहीं बल्कि 60 महिला सांसदों ने ही उठाया, इसमें वहां की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का नाम भी शामिल है. इसे लेकर एक याचिका भी सौंपी गई है, जिसमें ये मांग की गई है कि शौचालयों की संख्या बढ़ाई जाए. याचिका में ये बताया गया है कि संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं अब भी उसी पुराने ढांचे में अटकी हुई हैं.
याचिका में बताया गया है कि संसद के मुख्य सदन के पास महिला सांसदों के लिए सिर्फ एक शौचालय है, जिसमें महज दो क्यूबिकल हैं, जबकि निचले सदन में कुल 73 महिला सांसद चुनी गई हैं. इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी संवैधानिक डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद यासुको कोमियामा ने बताया कि पूर्ण सत्र शुरू होने से पहले महिलाओं को शौचालय के बाहर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है. कुल 58 महिला सांसदों ने साइन करके याचिका को निचले सदन की नियम एवं प्रशासन समिति के अध्यक्ष यासुकाज़ु हमादा को सौंपी है.
जापान की संसद में कुल कितने शौचालय हैं?
जानकारी के अनुसार जापान की संसद की इमारत 1936 में बनी थी, यानी उस वक्त जब महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी नहीं मिला था. वहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिसंबर 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद मिला. यही वजह है कि संसद की संरचना आज भी पुरुषों की संख्या को ध्यान में रखकर बनाई गई है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो निचले सदन की इमारत में पुरुषों के लिए 12 शौचालय हैं, जिनमें कुल 67 स्टॉल हैं, जबकि महिलाओं के लिए सिर्फ 9 शौचालय हैं और उनमें कुल 22 क्यूबिकल ही मौजूद हैं.
निचले सदन में 73 महिलाएं, जबकि ऊपरी सदन में 74
2024 के चुनाव में निचले सदन की 465 सीटों में से 73 पर महिलाएं चुनी गई हैं. यह पिछले संसद की तुलना में ज्यादा हैं. वहीं ऊपरी सदन में 248 में से 74 सदस्य महिलाएं हैं. जापान सरकार का टारगेट है कि संसद में कम से कम 30 फीसदी सीटों पर महिलाएं हों. प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने सत्ता में आने से पहले ‘नॉर्डिक देशों’ जैसी जेंडर बैलेंस की बात कही थी, लेकिन 19 सदस्यीय कैबिनेट में उन्होंने केवल दो अन्य महिलाओं को जगह दी है.
जेंडर इक्वैलिटी के मामले में पीछे है जापान
ये बात किसी से छिपी नहीं है कि जापान की स्थिति जेंडर इक्वैलिटी के मामले में पहले से ही कमजोर रही है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में जापान 2025 में 148 देशों में 118वें स्थान पर रहा. जापान की राजनीति के अलावा बिजनेस और मीडिया में भी महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है. जब जापान में चुनाव होते हैं तब वहां महिला उम्मीदवारों को अक्सर लैंगिक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है.
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