वेनेजुएला में जैसे ही सत्ता के समीकरण बदले, वैसे ही अमेरिका की सक्रियता खुलकर सामने आने लगी है. सालों तक तनातनी झेल चुके दोनों देशों के रिश्तों में अब बातचीत की गुंजाइश बनती दिख रही है. इसी कड़ी में अमेरिका सरकार की विशेष प्रतिनिधि लौरा डोगू वेनेजुएला पहुंच चुकी हैं.
मादुरो के समय क्यों बंद थे रास्ते?
पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कार्यकाल में अमेरिका और वेनेजुएला आमने-सामने रहे. आर्थिक प्रतिबंध, तीखे बयान और राजनयिक दूरी की वजह से अमेरिका सीधे तौर पर काराकास में कोई पहल नहीं कर पाया. इसी कारण अब यह चर्चा जोरों पर है कि मादुरो के हटते ही अमेरिका को एंट्री कैसे मिल गई.
‘उठवा लिया’ या राजनीतिक बदलाव?
सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मादुरो को जानबूझकर साइडलाइन किया गया. हालांकि, इस तरह के दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. फिलहाल इतना साफ है कि सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिका को बातचीत का मौका जरूर मिला है.
लौरा डोगू की एंट्री, बड़ा टर्निंग पॉइंट
फरवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिकी चार्ज डी एफेयर्स लौरा डोगू काराकास पहुंच गईं. ये 2019 के बाद पहली बार है जब अमेरिकी दूतावास फिर से खुल रहा है. विदेश मंत्री ईवान गिल ने टेलीग्राम पर लिखा कि ये दोनों देशों के बीच वर्किंग एजेंडे का हिस्सा है. बातचीत से पुराने मतभेद सुलझाए जाएंगे, आपसी हित के मुद्दों पर रोडमैप बनेगा. सब कुछ “म्यूचुअल रिस्पेक्ट” और इंटरनेशनल लॉ के आधार पर. डोगू ने खुद X पर पोस्ट किया, “मैं वेनेजुएला पहुंच गई हूं. मेरी टीम और मैं काम के लिए तैयार हैं.” एयरपोर्ट पर उतरते उनकी फोटोज भी शेयर हुईं. ये कदम दिखाता है कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन अब डिप्लोमेसी के जरिए कंट्रोल मजबूत कर रहा है.
ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की कोशिशें सही दिशा में बढ़ रही हैं. ट्रंप ने संकेत दिया था कि हालात सुधरने पर वेनेजुएला से तेल का निर्यात फिर शुरू हो सकता है और कई देश इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
क्या तेल ही असली वजह?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल वेनेजुएला अमेरिका के लिए हमेशा रणनीतिक महत्व रखता है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका तेल निर्यात की शर्तें तय करेगा, कीमतों पर असर डालेगा या खुद बड़ी भूमिका निभाएगा.
आगे क्या होगा? अमेरिका कर लेगा तेल पर कब्जा?
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. ट्रंप ने यह नहीं बताया कि तेल कब से, किन शर्तों पर और किन देशों को मिलेगा. लेकिन इतना तय है कि लौरा डोगू की इस यात्रा ने अमेरिका वेनेजुएला रिश्तों में एक नया अध्याय खोल दिया है. लेकिन वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल रिजर्व हैं, तो अमेरिका के लिए ये बड़ा गेम चेंजर है. इंटरिम गवर्नमेंट ने पॉलिटिकल प्रिजनर्स की रिहाई के लिए एमनेस्टी बिल भी पास कर दिया है जो अमेरिका की एक डिमांड थी. लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं है. चीन और रूस जैसे देश मादुरो की रिहाई की मांग कर रहे हैं. लोकल स्तर पर विरोध भी हो रहा है. ट्रंप का प्लान काम कर रहा है, लेकिन आगे क्या होगा, ये वक्त बताएगा. फिलहाल लग रहा है अमेरिका ने वेनेजुएला में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है.
