Trump ICE Minnesota: अमेरिका के मिनेसोटा में इन दिनों लोकतंत्र और संघीय शक्ति के बीच एक भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है. एक तरफ राज्य सरकार का आरोप है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आईसीई एजेंट नागरिकों को नस्लीय आधार पर निशाना बना रहे हैं और बेकसूरों की जान ले रहे हैं, तो दूसरी तरफ संघीय न्यायाधीश के एक ताजा फैसले ने ट्रंप प्रशासन के हाथ और मजबूत कर दिए हैं. हाल में आए रिपोर्ट में पता चला है कि, दो नागरिकों की मौत और हफ्तों चले हिंसक प्रदर्शनों के बाद भी कोर्ट ने इस अभियान को रोकने से मना कर दिया है.
हालांकि न्यायाधीश ने ये भी कहा कि हाल ही में एक फेडरल कोर्ट ऑफ अपील ने मिनेसोटा में आईसीई की कार्रवाई को सीमित करने वाली आदेश को रद्द कर दिया था. न्यायाधीश ने लिखा कि यदि वह आदेश ज्यादा था, तो पूरी कार्रवाई को रोकने का अनुरोध और भी ज्यादा असंगत होगा. इस मामले में मुकदमा यह मांग कर रहा था कि आईसीई के हजारों एजेंटों को मिनियापोलिस-सेंट पॉल में भेजने वाले अभियान को रोका जाए या सीमित किया जाए, जिससे हफ्तों तक प्रदर्शन और दो अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई थी.
नस्लीय आधार पर लगाया जा रहा है आरोप
मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने आरोप लगाया कि एजेंटों ने नागरिकों को नस्लीय आधार पर प्रोफाइल किया, बिना कानूनी कारण के कई घंटों तक रोका और भय फैलाया. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन ने राजनीतिक कारणों से मिनेसोटा को निशाना बनाया. वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह अभियान अमेरिकी इमिग्रेशन कानून लागू करने और अपराध पर नियंत्रण रखने के लिए जरूरी है.
जनवरी में मिनियापोलिस-सेंट पॉल में हुई दो मौतों ने तनाव बढ़ा दिया. 7 जनवरी को रिनी गुड को उनके कार में आईसीई एजेंट ने गोली मार दी, जबकि 24 जनवरी को बॉर्डर पेट्रोल एजेंट ने एलेक्स प्रेट्टी की हत्या की. इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिससे एजेंटों की कार्रवाई पर सवाल उठे और उन्हें कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराने की मांग हुई.
ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि एजेंटों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की. उन्होंने कई अन्य डेमोक्रेट शासित शहरों में भी संघीय कानून प्रवर्तन एजेंट तैनात किए, जैसे लॉस एंजेलिस, शिकागो, वाशिंगटन डीसी और पोर्टलैंड. ट्रंप का कहना है कि यह कार्रवाई कानून लागू करने और अपराध नियंत्रित करने के लिए जरूरी है, जबकि डेमोक्रेट्स इसे उनके शक्तियों का दुरुपयोग मानते हैं.
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