
Venezuela Nicolus Maduro Update: वेनेजुएला में आखिरकार निकोलस मादुरो की सरकार का तख्तापलट हो गया, जैसा ट्रंप लंबे समय से चाहते थे. मादुरो के साथ ऐसा सुलूक किया जाएगा ये किसी ने सोचा भी न होगा. तख्तापलट अगर एक फिक्सिंग है तो ये साजिश किसने और किस मकसद से की? ऐसे सवालों का जवाब तो आने वाले वक्त में मिल जाएगा लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के इस एक्शन ने उन देशों की साख पर बट्टा लगा दिया है जो मादुरो का साथ देने का दम भर रहे थे. चीन से लेकर रूस और ईरान जैसे देश लगातार कह रहे थे कि वो अमेरिका के खिलाफ मादुरो की मदद करेंगे. ईरान ने तो ये तक वादा कर दिया था कि वेनेजुएला को अमेरिका से बचाने के लिए हथियार भी सप्लाई किए जाएंगे लेकिन अमेरिकी डेल्टा फोर्स आई. मादुरो को उठाकर ले गई और कोई कुछ नहीं कर पाया.
चीन को झटका!
मादुरो के इस अचानक हुए तख्तापलट से सबसे बड़ा झटका चीन को लगा है क्योंकि पिछले कुछ वक्त से चीन ही वो देश है जो अमेरिका को चुनौती देने के लिए लैटिन अमेरिकी देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. लेकिन ट्रंप के एक एक्शन ने चीन की पूरी बिसात कैसे बिगाड़ी है. ये भी हम आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले आपको वो झुंझलाहट भरा बयान देखना चाहिए जो वेनेजुएला की घटनाओं पर चीन से आया है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘वेनेजुएला में अमेरिका की अनैतिक दखल की हम आलोचना करते हैं. अमेरिका ने जो किया उससे राजनीतिक और आर्थिक संकट पैदा हो गया है. हम दुनिया से अपील करते हैं कि वेनेजुएला की राजनीतिक और क्षेत्रीय संप्रुभता की सुरक्षा की जाए’.
ये कहना गलत नहीं होगा कि मादुरो के साथ ट्रंप ने जो किया. उसने बीजिंग को ऐसी हालत में ला दिया है कि वो मुंह दिखाने लायक नहीं रहा है. इस वक्त अपने टीवी स्क्रीन पर जो तस्वीरें आप देख रहे हैं वो अमेरिकी हमले से दस घंटे पहले की हैं जब जिनपिंग के विशेष दूत और मादुरो की मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात में जिनपिंग के राजदूत ने वेनेजुएला के साथ हुए 600 समझौतों को आगे बढ़ाने पर बातचीत की थी और मादुरो को सुरक्षा का भरोसा भी दिया था. लेकिन ये भरोसा धरा का धरा रह गया.
ट्रंप ने अचानक हमला करके ये मैसेज दे दिया कि अमेरिका के पड़ोस में ट्रंप का ही दबदबा चलता है. वेनेजुएला से मादुरो का एग्जिट चीन को क्यों टेंशन देगा. अब हम आपको इससे जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं.
जब अमेरिका में ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ ले रहे थे तब चीन और वेनेजुएला ने एक तेल प्रोजेक्ट में सहयोग पर सहमति जताई थी. इस प्रोजेक्ट का मकसद था वेनेजुएला के तेल उत्पादन को पांच गुना बढ़ाना और इसके लिए चीन ने 8300 करोड़ रुपए का निवेश किया था. आर्थिक के साथ ही साथ चीन से वेनेजुएला को सामरिक मदद भी मिलनी थी. सामरिक समझौतों के तहत चीन से वेनेजुएला को क्रेडिट पर फाइटर जेट और निगरानी करने वाले नौसैनिक जहाज मिलने थे.
डर!
चीन का मकसद था कि वेनेजुएला के जरिए वो लैटिन अमेरिका तक अपनी सप्लाई चेन बढ़ाए यानी वेनेजुएला के बंदरगाहों पर चीन का प्रभुत्व स्थापित हो जाए. इसके लिए चीन ने ला-गुएरा बंदरगाह को विकसित करने का भी प्रस्ताव दिया था. इसी ला-गुएरा बंदरगाह को भी ट्रंप के ऑर्डर पर हुई स्ट्राइक ने तबाह कर दिया है. यानी ट्रंप ने ना सिर्फ अपने बयानों बल्कि अपने कदमों से भी ये बता दिया कि लैटिन अमेरिका में वो किसी भी प्रतिद्वंदी को पांव नहीं जमाने देंगे.ये तो बड़े-बड़े देशों की बात हुई. अब हम आपको वेनेजुएला के उन पड़ोसी देशों के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनके अंदर ट्रंप का डर बैठ गया है.
ये दो देश हैं कोलंबिया और क्यूबा. दोनों ही अमेरिका के पारंपरिक प्रतिद्वंदी रहे हैं और ट्रंप से तनातनी के दौरान दोनों ही देशों ने मादुरो का साथ देने का दावा किया था. मदद तो कर नहीं पाए लेकिन उन्हें ये पता चल गया अगर ट्रंप के शिकंजे से वेनेजुएला नहीं बच पाया तो उनका वक्त आने में भी देर नहीं है. लिहाजा कोलंबिया ने वेनेजुएला से लगती सरहद पर हाई अलर्ट जारी कर सेना की तैनाती बढ़ा दी है. दूसरी तरफ क्यूबा ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वो जल्द दखल देकर समाधान निकाले.
एक कहावत है. सौ सुनार की…एक लोहार की. ट्रंप इस कहावत वाले लोहार नजर आ रहे हैं. चीन सालों से अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहा था. ईरान का मकसद था कि अमेरिका की सरहदों पर एक सामरिक चुनौती पैदा की जाए. क्यूबा और कोलंबिया एक ऐसा गठबंधन बनाना चाहते थे जो ट्रंप को आगे बढ़ने से रोक पाए. लेकिन हुआ क्या? ट्रंप ने आधे घंटे में सबके मंसूबों पर पानी फेरकर सख्त चेतावनी जारी कर दी कि जो सामने आएगा बच नहीं पाएगा. मादुरो के बाद वेनेजुएला में अमेरिका की कठपुतली सरकार आएगी तो पूरे क्षेत्र का सामरिक और आर्थिक समीकरण 360 डिग्री घूम जाएगा.
