
Jammu Kashmir Terror Figure News: जम्मू- कश्मीर ने सुरक्षा के मामले में 2025 में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की. सुरक्षाबलों के मुताबिक, पिछले दो दशकों में यह सबसे कम हिंसक साल रहा. जिसमें सालाना मरने वालों की संख्या 100 से कम रही. अप्रैल में हुए हाई-प्रोफाइल पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद ऐसा हुआ.
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों और आतंकवादियों सहित 92 लोग मारे गए. यह पिछले सालों की तुलना में एक बड़ी कमी है, जब मरने वालों की संख्या में लगातार 100 से ज़्यादा रहती थी. 2024 में, आतंकवाद से जुड़ी मौतों की संख्या 127 थी, इसके बाद 2023 में 134, 2022 में 253, 2021 में 274 और 2020 में 321 थी.
हताहतों की संख्या में आ रही गिरावट
2025 में दर्ज की गई 92 मौतों में से 46 आतंकवादी थे. जिनमें स्थानीय और विदेशी दोनों आतंकवादी शामिल थे. उनमें से ज़्यादातर पाकिस्तानी नागरिक थे. इस साल सत्रह सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई, जबकि नागरिकों की मौत की संख्या 28 थी.
2020 की तुलना में यह गिरावट ज़्यादा साफ़ दिखती है, जिस साल ज़बरदस्त आतंकवादी गतिविधियां हुई थीं. उस साल 232 आतंकवादी मारे गए थे, जबकि सुरक्षा बलों के 56 जवान शहीद हुए थे. आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में नागरिकों की कुल मौतें 33 थीं.
2024 में बढ़ी थी मौतों की संख्या
2024 के आंकड़े भी सभी श्रेणियों में ज़्यादा मौतों का संकेत देते हैं. जिसमें 69 आतंकवादी मारे गए, 26 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और इस साल 31 नागरिकों की मौत हुई.
नियंत्रण रेखा (LoC) पर, सुरक्षा बलों ने घुसपैठ रोकने के उपायों को और मज़बूत किया. 2025 में, उत्तरी कश्मीर में आठ आतंकवादी मारे गए, जबकि घुसपैठ की 13 कोशिशों को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया, जिससे आतंकवादियों को इस क्षेत्र में घुसने से रोका गया.
जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे साल आतंकवाद विरोधी अभियान जारी रखे. क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए चौबीसों घंटे काम किया. सुरक्षा बलों की ओर से लगभग 3,000 छापे मारे गए. मुख्य रूप से कश्मीर घाटी में और जम्मू संभाग में भी कई ऑपरेशन किए गए.
प्रदेश में 132 आतंकी सक्रिय
इस बीच आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जम्मू और कश्मीर में फिलहाल लगभग 132 आतंकवादी सक्रिय हैं. इनमें से 122 विदेशी आतंकवादी हैं, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के हैं. जबकि बाकी स्थानीय रंगरूट हैं. डेटा से पता चलता है कि 2025 में विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. इस साल उनकी संख्या दोगुनी हो गई, जबकि स्थानीय भर्ती बहुत कम रही. खास बात यह है कि 2025 में सिर्फ़ एक स्थानीय व्यक्ति आतंकवादी संगठनों में शामिल हुआ.
