
Bengaluru pregnant woman harassment: बेंगलुरु से एक ऐसी खबर आई है जो रिश्तों पर से भरोसा उठा देगी. 34 वर्षीय ज्योति पांडे, जो नौ महीने की गर्भवती हैं, आज अपनों की ही दी हुई चोटों के निशान और मानसिक जख्मों के साथ न्याय की गुहार लगा रही हैं. 2017 में वाराणसी में बड़े अरमानों के साथ शुरू हुई शादी, शक की ऐसी भेंट चढ़ी कि पति अनुराग पांडे ने अपनी ही गर्भवती पत्नी के चरित्र पर सवाल उठा दिया, और उन्हें अपने घर से बाहर निकाल दिया.
गाली-गलौज से शुरू हुआ सिलसिला मारपीट और घर से बाहर निकालने तक जा पहुंचा था. जब लोग एक नए मेहमान के स्वागत की तैयारी करती है, तब ज्योति को पुलिस और महिला हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाना पड़ रहै है. आखिर कैसे एक हंसता-खेलता परिवार शक की आग में जल गया. आज हम इसके बारे में डिटेल से जानेंगे.
कैसे खराब हुए हालात?
ज्योति पांडे शादी के बाद वो पति के साथ बेंगलुरु आ गई थीं. पति वहीं नौकरी करता था. उनके शादीशुदा जीवन की बात करें तो शुरुआती कुछ साल बहुत अच्छे से बीत रहा था. परिवार में किसी तरह का बड़ा विवाद नहीं था. लेकिन समय के साथ हालात बदलने लगे. महिला का कहना है कि परेशानी की शुरुआत उनकी पहली गर्भावस्था के दौरान हुई थी.
शिकायत में महिला ने बताया कि उनके पति अनुराग पांडे ने अचानक उनके चरित्र पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. बिना किसी ठोस वजह के उन पर शक किया जाने लगा. बातों में ताने दिए जाते थे. अपमानजनक शब्द बोले जाते थे. धीरे-धीरे यह व्यवहार गाली गलौज और मारपीट में बदल गया.
आए दिन होते थे झगड़े
महिला का कहना है कि पहली बच्चे के जन्म के बाद भी हालात बेहतर नहीं हुए. घर में आए दिन झगड़े होने लगे. मानसिक दबाव लगातार बना रहा. उन्होंने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. परिवार के दूसरे सदस्य भी इस व्यवहार को रोकने के बजाय चुप रहे.
महिला ने पुलिस को बताया कि साल 2021 से लेकर 2025 के बीच उन्हें बार बार प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी. शिकायत में ये भी कहा गया है कि इस दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया. कुछ समय के लिए पूरा परिवार तमिलनाडु में रह रहा था. वहीं पर विवाद और ज्यादा बढ़ गया.
महिला का आरोप है कि वहां उनके पति के साथ साथ ससुराल के अन्य सदस्यों ने भी उनके साथ मारपीट की, और कई बार घर के अंदर ही उनके साथ धक्का-मुक्की की गई. वो डर के माहौल में रहने को मजबूर थीं. गर्भवती होने के बावजूद उनसे सामान्य इंसान जैसा व्यवहार नहीं किया गया.
दूसरी गर्भावस्था के दौरान हालात हुए और खराब
महिला का कहना है कि दूसरी गर्भावस्था के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो गए. उस समय भी उन पर बेवफाई का आरोप लगाया गया. बिना किसी सबूत के उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए. महिला के मुताबिक इसी दौरान उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया.
वह उस समय 9 महीने की गर्भवती थीं. इसके बावजूद उनके हालात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. उन्होंने बताया कि उन्हें मानसिक रूप से तोड़ा गया. शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया. हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें कुछ समय के लिए अपने मायके जाना पड़ा.
कुछ समय बाद वो दोबारा बेंगलुरु लौटीं. इसके बाद उन्होंने मदद के लिए महिला हेल्पलाइन से संपर्क किया था. वहां उनकी काउंसलिंग कराई गई. काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद महिला ने से शिकायत दर्ज कराई.
साउथ वुमन पुलिस स्टेशन में दर्ज की शिकायत
यह शिकायत साउथ वुमन पुलिस स्टेशन में दी गई. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है. पीड़िता के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. पुलिस ने सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है.
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि की जाएगी. परिवार के सदस्यों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. अधिकारियों ने बताया कि इस जांच में ये देखा जाएगा कि किस-किस ने महिला के साथ दुर्व्यवहार किया है.
पुलिस ने यह भी कहा है कि पीड़िता की सुरक्षा और काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. महिला को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. फिलहाल मामले की जांच जारी है. आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों के आधार पर की जाएगी.
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