Trump Approval Rating: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ गुजर रही है. हाल ही में आई एक ओपिनियन पोल ने व्हाइट हाउस और डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सर्वे के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी नागरिक राष्ट्रपति ट्रंप के देश चलाने के तरीके से खुश नहीं है, खासकर कीमतों, नौकरियों और दूसरे देशों के साथ संबंधों जैसे मुद्दों पर. ये सर्वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पहले के वैश्विक शुल्कों को रद्द करने से ठीक पहले किया गया था. 

अप्रूवल रेट में गिरावट 
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, ट्रंप की काम करने के तरीके को पसंद करने वाले लोगों की संख्या में भारी गिरावट आई है. उनके कार्यकाल की शुरुआत में जहां उन्हें लोगों का ज्यादा समर्थन मिला था, वहीं अब ये संख्या केवल 33% से 38% एडल्ट अमेरिकन हो गए हैं, जो उनके प्रशासन के काम करने के तरीके से संतुष्ट हैं. ये गिरावट न केवल विपक्षी डेमोक्रेट्स बल्कि निर्दलीय और कुछ रिपब्लिकन समर्थकों के बीच भी देखी गई है. 

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अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी चुनौती 
अमेरिका में अर्थव्यवस्था और महंगाई सबसे बढ़ी चुनौती बनती जा रही है. अमेरिकी जनता की सबसे बड़ी नाराजगी बढ़ती महंगाई और बढ़ती रहने की लागत है. सर्वे के अनुसार 70% लोगों का मानना है कि उनके इलाके में जीवनयापन करना अब आर्थिक तरीके से आसान नहीं रहा. हेल्थ केयर की बढ़ती कीमतें और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले चीजों के बढ़ते दाम से लोग खुद को आर्थिक रूप से कमजोर महसूस कर रहे हैं. 

 

इमिग्रेशन और प्रशासनिक फैसलों 
ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन और सामूहिक निर्वासन को लेकर कई सख्त उठाए हैं, जिसकी खबरों ने देश में बहस छेड़ दी है. हालांकि उनके कुछ समर्थक उनके इस फैसलों के साथ हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग है, जो इन फैसलों को अमानवीय और अराजक बता रहा है. वहीं सरकारी एजेंसियों में बड़े पैमाने पर छंटनी और ‘गवर्नमेंट शटडाउन’ जैसी स्थितियों ने भी जनता के भरोसे को कम किया है. 

 

विदेशी नीति और घरेलू अशांति का डर
रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि कई अमेरिकी नागरिक ट्रंप की विदेशी नीतियों से चिंतित हैं. खासतौर पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों से हटने और युद्ध जैसे हालातों में अमेरिका की भूमिका को लेकर. इसके साथ-साथ देश में अंदर नागरिक स्वतंत्रता और लोगतांत्रिक लोकप्रियता का ग्रफ भी नीचे जा रहा है. ऐसे में ये सर्वे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है.