Trump Tariffs: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार 20 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास टैरिफ लगाने का कोई अधिकार नहीं है. इसपर प्रतिक्रिया देते हुए ट्र्ंप ने अमेरिका में विदेशों से आने वाले सामानों पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया. अब इस फैसले को लेकर फेमस भारतीय-अमेरिकी वकील नील कात्याल ने महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाए हैं, जो जस्टिस डिपार्टमेंट की ओर से दिए गए तर्कों के साथ सीधे विरोधाभास की ओर इशारा करते हैं. 

ट्रेड पॉलिसी के खिलाफ तर्क 

कात्याल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ में सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन की पिछली ट्रेड पॉलिसीज के खिलाफ चुनौती देते हुए सुझाव दिया था कि राष्ट्रपति की ओर से 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 पर भरोसा करना कानूनी रूप से गलत हो सकता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन की अपनी कानूनी टीम ने पहले ही उस कानून से खुद को अलग कर लिया था. वहीं कात्याल ने अब कोर्ट को दिए गए जस्टिस डिपार्टमेंट के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा,’ न तो सेक्शन122 का यहां कोई क्लियर एप्लिकेशन है, जिसमें राष्ट्रपति की ओर से इमरजेंसी घोषित करने में पहचानी गई चिंताएं ट्रेड डेफिसिट से पैदा होती हैं, जो पेमेंट डेफिसिट बैलेंस से वैचारिक रूप से अलग हैं.’   

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टैरिफ लगाना हो सकता है मुश्किल 

कात्याल ने तर्क दिया कि इस पूर्व स्थिति के कारण राष्ट्रपति के लिए वर्तमान टैरिफ के लिए सेक्शन 122 लागू करना अब मुश्किल हो गया है.

बता दें कि यह जांच-पड़ताल सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के तुरंत बाद शुरू हुई है, जिसमें ट्रंप के पहले के अधिकांश व्यापक टैरिफ सल्यूशन को रद्द कर दिया गया था. कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि प्रशासन ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करके इंपोर्ट ड्यूटी लगाने में अपने अधिकार का उल्लंघन किया है और इस बात की पुष्टि की कि टैक्स लगाने की शक्ति मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है.

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कांग्रेस से लेना होगा लेजिस्लेटिव अप्रूवल 

कात्याल ने इस बात पर जोर दिया कि अगर राष्ट्रपति व्यापक टैरिफ लगाना चाहते हैं, तो उन्हें कार्यकारी कानूनों पर भरोसा करने के बदले कांग्रेस से लेजिस्लेटिव अप्रूवल लेने की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि टैरिफ लगाना एक अच्छा विचार है तो कांग्रेस को इसके लिए राजी करना मुश्किल नहीं होना चाहिए क्योंकि संविधान में यही अनिवार्य है. IMF की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भी कात्याल के नजरिए का समर्थन किया है.