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डीएफएस ने दिव्यांगजनों हेतु वित्तीय सेवाओं की पहुंच बेहतर करने पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला पूरी की


प्रख्यात अभिगम्यता विशेषज्ञों और दिव्यांगजन कर्मचारियों ने संस्थानों में पहुंच को बेहतर करने के संबंध में अपने दृष्टिकोण और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि साझा की

वित्तीय संस्थानों में समावेशिता को प्रोत्साहन देने के लिए हितधारकों ने व्यावहारिक उपायों पर विचार-विमर्श किया

प्रविष्टि तिथि: 21 AUG 2026 9:14PM by PIB Delhi

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से 20-21 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित अपने स्टाफ कॉलेज में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।

दूसरे दिन की चर्चा में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी), सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों (पीएसआईसी), विभिन्न क्षेत्रों के नियामकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) में दिव्यांगजनों (विकलांग लोगों) के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इस कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, 7 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और 7 सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के कई मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और वरिष्ठ मानव संसाधन अधिकारी शामिल हुए।

सुगम्य भारत पहल को उजागर करते हुए, अभिगम्यता मानकों और अनुपालन संबंधी जरूरतों पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसके बाद अभिगम्यता से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर एक गोलमेज चर्चा हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने व्यावहारिक चुनौतियों, अपेक्षाओं और जमीनी हकीकतों पर विचारविमर्श किया और संस्थानों में अभिगम्यता बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया। अभिगम्यता के क्षेत्र में कार्यरत प्रख्यात हस्तियों और कई दिव्यांगजन कर्मचारियों ने कार्यशाला में अपने दृष्टिकोण और व्यावहारिक अनुभव साझा किए।

कार्यशाला का समापन एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को वित्तीय सेवाओं के संपूर्ण इकोसिस्टम में समावेशिता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत क्षमता को और मजबूत करने हेतु परिचालन संबंधी चुनौतियों और व्यावहारिक उपायों पर विचारविमर्श करने का मौका मिला। कार्यशाला ने वित्तीय सेवाओं में समावेशिता और समान पहुंच को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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पीके/केसी/एमएम

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