बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब एक टीचर ने बीएनपी के बड़े नेता तारिक रहमान के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए. अब उस टीचर को जमानत मिल गई है, लेकिन यह मामला अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक सहनशीलता पर सवाल उठा रहा है.
क्या हुआ था घटनास्थल पर?
पुलिस के मुताबिक, शनिवार को तारिक रहमान शरीफ ओसमान हादी की कब्र पर गए थे. वहीं पर गाबतोली टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर के वाइस प्रिंसिपल एकेम शाहिदुल इस्लाम ने जोर-जोर से नारे लगाए. उन्होंने तारिक रहमान को “पैसे का लालची” और “आतंकवादी” कहा. मौके पर मौजूद बीएनपी के नेता और कार्यकर्ताओं ने टीचर को पकड़ लिया और शाहबाग पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने उन्हें कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 54 के तहत गिरफ्तार किया. पहले अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया था, लेकिन रविवार को दोपहर की सुनवाई के बाद ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मोहम्मद ज्वेल राना ने जमानत दे दी. प्रॉसिक्यूशन के सब-इंस्पेक्टर स्वपन ने उनकी रिहाई की पुष्टि की.
बीएनपी ने क्यों की गिरफ्तारी की निंदा?
बीएनपी के सीनियर जॉइंट सेक्रेटरी जनरल रुहुल कबीर रिजवी ने शनिवार को ही बयान जारी कर गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को अपनी राय व्यक्त करने की आजादी होती है. बीएनपी लंबे समय से लोकतंत्र और बोलने की आजादी के लिए लड़ रही है. सिर्फ अपनी राय रखने के लिए एकेम शाहिदुल इस्लाम को गिरफ्तार कर जेल भेजना गलत है.”रिजवी ने टीचर की तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग की और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की अपील की. बीएनपी का कहना है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की भावना से की गई है.
17 साल बाद लंदन से वापस आए हैं तारिक रहमान
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी चेयरमैन तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर 2025 को ढाका लौट आए हैं. लंदन से परिवार के साथ आए तारिक को लाखों समर्थकों ने एयरपोर्ट से लेकर रैली तक जोरदार स्वागत किया था. तारिक की ये वापसी ऐसे समय में हुई है जब देश में नए चुनाव होने वाले हैं और तारिक को अगला प्रधानमंत्री बनने का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है.
