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Darbhanga: उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में रविवार की शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोगों को यह जानकारी मिली कि शिशु रोग विभाग में कोरोना से पहली मौत ढाई माह के बच्चे की हुई है. मौत की खबर सुनने के बाद पूरा अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और बच्चे की डेड बॉडी को कोविड प्रोटोकॉल के हिसाब से परिजनों को सौपते हुए एम्बुलेंस से मधुबनी भेज दिया.

नवजात कोरोना मरीज के संबंध में बताया जा रहा है कि कोरोना से मृत बच्चे को उनके परिजनों के द्वारा रविवार की सुबह 6 बजे भर्ती कराया गया. इससे पहले उसका इलाज पटना के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में हो रहा था. बच्चे की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे वहां से डिस्चार्ज कर दिया गया.

इसके बाद बच्चे के परिजनों ने उसे DMCH के शिशु रोग विभाग में भर्ती कराया. यहां डॉक्टरों ने बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए उसे शिशु विभाग के ICU वेंटीलेटर पर रखकर बचाने की काफी कोशिश की. लेकिन इलाज के क्रम में रविवार की शाम 4:30 बजे उसकी मौत हो गई. वहीं, इस उम्र के बच्चे की कोरोना से मौत का यह दुर्लभ मामला है.

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शिशु रोग विभाग में तीन और सगे भाई-बहनों ने भी तोड़ा दम 
इसके अलावा शिशु वार्ड में मधुबनी जिला के इटहरवा गांव निवासी रामपुनीत यादव के तीन बच्चे चंदन, पूजा व आरती की मौत भी पिछले 24 घंटे में हो गई. रामपुनीत यादव ने तीनों बच्चों को 28 मई की शाम शिशु वार्ड में भर्ती करवाया था. जहां 29 मई की देर शाम चंदन और पूजा की मौत हो गई तथा 30 मई को आरती ने भी दम तोड़ दिया. इन सभी बच्चों को निमोनिया जैसे लक्षण थे, सभी को बुखार, सांस फूलना व देह-हाथ में सूजन की परेशानी थी. जो कोरोना संक्रमण के लक्षण से मिलते-जुलते है. 

वहीं, इस मामले में DMCH प्रशासन का कहना है कि ‘एक ढाई माह के बच्चे की मौत कोरोना से हुई है. जिसे कोविड प्रोटोकॉल के तहत परिजनों को सौंप दिया गया है. वहीं, तीन बच्चों की मौत निमोनिया रोग से ग्रसित होने के कारण हुई है. इन लोगों की कोरोना जांच करवाई गई थी. जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई थी. सभी बच्चों में खून की कमी थी और निमोनिया से पीड़ित थे. सभी का हीमोग्लोबिन 4 से नीचे था.’

(इनपुट- मुकेश)