दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच चल रही खींचतान में अब ब्रिटेन भी खुलकर सामने आ गया है. चीन के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मरकी बीजिंग यात्रा पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ट्रंप ने चीन के साथ बिजनेस और रणनीतिक साझेदारी को ब्रिटेन के लिए “खतरनाक” बताया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है.
आठ साल बाद बीजिंग पहुंचे ब्रिटिश पीएम
कीर स्टार्मरचीन की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं. वह पिछले आठ वर्षों में बीजिंग जाने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री बने हैं. इस दौरान उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से करीब 80 मिनट तक बातचीत की. दोनों नेताओं ने आपसी रिश्तों को नई दिशा देने और पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ने की बात कही.
ट्रंप क्यों भड़के?
स्टारमर की चीन यात्रा पर सवाल पूछे जाने पर डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, “चीन के साथ ऐसा करना उनके लिए बहुत खतरनाक है.” हालांकि ट्रंप ने सीधे किसी सजा या कार्रवाई की बात नहीं कही, लेकिन उनके बयान को ब्रिटेन के लिए कड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि अमेरिका नहीं चाहता कि उसका करीबी सहयोगी चीन के साथ ज्यादा गहरे रिश्ते बनाए.
शी जिनपिंग का संदेश: संवाद जरूरी
बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक हालात में चीन और ब्रिटेन को आपसी संवाद और सहयोग बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में रिश्तों में उतार-चढ़ाव आया, लेकिन यह दोनों देशों के हित में नहीं था.
स्टारमर ने दिया अमेरिका को जवाब?
कीर स्टार्मरने भी अपने बयान में संकेत दिया कि ब्रिटेन किसी दबाव में फैसले नहीं लेगा. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्थिरता और दुनिया के मुश्किल दौर में देशों का साथ आना जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिका की उस नीति को चुनौती देता है, जिसमें चीन को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश की जा रही है.
पुराने विवाद अब भी बरकरार
ब्रिटेन और चीन के रिश्तों में लंबे समय से कई विवाद रहे हैं. ब्रिटेन में चीनी जासूसी के आरोप, यूक्रेन युद्ध में चीन का रूस को समर्थन और हांगकांग में आज़ादी पर सख्ती जैसे मुद्दे अब भी दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह हैं. इसके बावजूद दोनों देश अब रिश्तों को “रणनीतिक साझेदारी” की ओर ले जाना चाहते हैं. स्टारमर की यह यात्रा सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रिश्तों की भी परीक्षा मानी जा रही है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ब्रिटेन किस संतुलन के साथ आगे बढ़ता है.
