South Korea News: साल 2024 में साउथ कोरिया में मार्शल लॉ लगा था. मार्शल लॉ लागू होने के दौरान नेशनल असेंबली में दो मिलिट्री कमांडर ने घुसपैठ की थी. वो सांसदों को अरेस्ट करने की कोशिश कर रहे थे. अब इन मिलिट्री कमांडरों पर सख्त एक्शन हुआ है. जनरल-लेवल के मिलिट्री कमांडरों को आज डिसिप्लिनरी एक्शन में बर्खास्त कर दिया गया है. जानिए क्या है पूरा मामला. 

सूत्रों के मुताबिक, साउथ कोरिया के डिफेंस मिनिस्ट्री ने ब्रिगेडियर जनरल ली सांग-ह्यून पर यह डिसिप्लिनरी एक्शन लिया है. ब्रिगेडियर जनरल ली सांग-ह्यून 1st स्पेशल फोर्सेज ब्रिगेड के पूर्व कमांडर थे. उन पर आरोप है कि उन्होंने सांसदों को मार्शल लॉ के फैसले के खिलाफ वोट करने से रोकने के लिए नेशनल असेंबली में घुसने के लिए सैनिकों को लीड किया था.

मिनिस्ट्री ने डिफेंस काउंटरइंटेलिजेंस कमांड के पूर्व इन्वेस्टिगेटिव चीफ रियर एडमिरल किम डे-वू को भी बर्खास्त कर दिया, जिन पर मार्शल लॉ लागू होने के दौरान नेताओं को अरेस्ट करने के लिए एक टीम भेजने का शक है. ली और किम दोनों पर मार्शल लॉ लागू करने में शामिल होने का केस चल रहा है. एक बयान में, मिनिस्ट्री ने कहा कि उसने दो जनरल-लेवल के अधिकारियों के खिलाफ “भारी” डिसिप्लिनरी एक्शन लिया है, लेकिन उनके नाम, रैंक और सजा का लेवल नहीं बताया.

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यह बर्खास्तगी मार्शल लॉ लगाने में शामिल लोगों को सजा देने के लिए मिलिट्री की चल रही कार्रवाई में सबसे नई है. डिफेंस काउंटरइंटेलिजेंस कमांड और आर्मी स्पेशल वारफेयर कमांड के दोनों पूर्व टॉप कमांडरों को भी निकाल दिया गया है. इससे पहले साउथ कोरिया के डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि छह मिलिट्री अधिकारियों से जुड़े मार्शल लॉ से जुड़े एक ट्रायल को एक स्पेशल काउंसिल टीम के अनुरोध पर सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भेज दिया गया है. 

आर्मी स्पेशल वारफेयर कमांड के 707वें स्पेशल मिशन ग्रुप के हेड कर्नल किम ह्यून-ताए और पांच अन्य अधिकारियों पर दिसंबर 2024 में पूर्व प्रेसिडेंट यून सुक येओल के मार्शल लॉ की कोशिश में अहम भूमिका निभाने के आरोप में कोर्ट-मार्शल में ट्रायल चल रहा है. (IANS)