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सुशील कुमार बक्सला/सरगुजा:राष्ट्रीय मित्र पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के ओपी अग्रवाल ने पांच डिसमिल जमीन में एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें फलों के अलावा सब्जी, शहद और मशरुम का उत्पादन कर एक किसान हर साल 70 से 80 हजार रुपये कमा सकता है.कृषि वैज्ञानिकों ने इस मॉडल को प्रमाणित भी किया है.

जब देश में एक समय ऑक्सीजन को लेकर लोग परेशान हो रहे थे. उस वक्त छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर के रहने वाले वृक्ष मित्र प्राकृतिक को बचाए रखने के लिए 50 एक्कड़ फार्म हाउस की बंजर जमीन में इन्होंने पेड़ लगाना शुरू किया. जिसके बाद देखते ही देखते हजारों की संख्या में यहां पेड़ तैयार हो गए हैं. जिससे शहर के लोगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन भी मिल सकेगी.

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ओपी अग्रवाल के बागान में विभिन्न किस्मों के 400 से अधिक अमरूद के पौधों हैं. जो साल में दो बार फल देते हैं.वही कई ऐसे फलदार पेड़ जैसे आम, पपीते, केले, सीताफल, अमरुद, मुंगे और नींबू  के पेड़ भी लगे हैं. 

इसके लिए वृक्ष मित्र की जितनी सहराना की जाए उतनी कम है. क्योंकि पिछले 4 दशक से पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कई किस्म के पेड़ पौधों की रोपाई की, जो आज विशाल वृक्ष के रूप में तैयार हो चुके हैं.

वृक्ष मित्र ओपी अग्रवाल के अनुसार उनका प्रारंभिक जीवन चुनौती पुर्ण रहा है. उन्होंने बताया कि ये उनके पिताजी द्वारा ली गई बंजर जमीन थी. जहां कोई पेड़ पौधा नहीं लगता था.उन्होंने बताया कि उनके सामने कोई विकल्प नहीं था और साथ ही यहां पानी की कमी थी. वह अपने स्कूटर में जितने पौधे ला सकते थे लाया करते थे. उनकी मेहनत से बरसात भर में यह जंगल खड़ा हो गया. 

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