Tarique Rahman: आम चुनाव हो जाने के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है. शेख हसीना सरकार के पतन के बाद कराए गए आम चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) को प्रचंड बहुमत मिला है. पार्टी की अगुवाई कर रहे तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. हालांकि संसद भंग होने और स्पीकर के पद रिक्त होने से शपथ ग्रहण प्रक्रिया को लेकर संवैधानिक सवाल उठ खड़े हुए हैं.
संवैधानिक प्रावधान क्या कहते हैं?
बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार, आम चुनाव के नतीजों के सरकारी गजट में प्रकाशित होने के तीन दिन के भीतर निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाना अनिवार्य है. चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणामों को अंतिम नहीं माना जाता; सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ती है. सूत्रों के मुताबिक, अंतरिम प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 18 फरवरी तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. संवैधानिक समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं.
स्पीकर नहीं, तो कौन दिलाएगा शपथ?
आम तौर पर संसद के स्पीकर निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाते हैं. लेकिन 2024 के राजनीतिक आंदोलन के बाद संसद भंग हो चुकी है और स्पीकर का पद भी खाली है. डिप्टी स्पीकर के जेल में होने से स्थिति और जटिल हो गई है. ऐसी परिस्थिति में संविधान के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त सांसदों को शपथ दिला सकते हैं. इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति किसी अधिकृत व्यक्ति जैसे देश के मुख्य न्यायाधीश को शपथ दिलाने के लिए नामित कर सकते हैं. सूत्रों की माना जाए तो मौजूदा हालात में यही विकल्प अपनाया जा सकता है.
राष्ट्रपति की भूमिका अहम
वर्तमान में मोहम्मद शहाबुद्दीन बांग्लादेश के राष्ट्रपति हैं. वे 2023 में इस पद पर आसीन हुए थे और उनका कार्यकाल 2028 तक है. संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, आम चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली पार्टी को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करना राष्ट्रपति का दायित्व है. बांग्लादेश की संसद में कुल 300 सीटें हैं और 151 सीटें बहुमत के लिए आवश्यक होती हैं.
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बीएनपी ने इस चुनाव में 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है. ऐसे में सरकार गठन का रास्ता उसके लिए साफ माना जा रहा है. प्रधानमंत्री पद की शपथ राष्ट्रपति ही दिलाते हैं. इसके बाद संविधान के अनुच्छेद 56 के तहत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों को भी शपथ दिलाते हैं. शपथ ग्रहण प्रक्रिया पूर्ण होने के साथ ही नई सरकार के गठन की औपचारिक घोषणा की जाती है और प्रधानमंत्री कार्यभार संभाल लेते हैं.
