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Dholpur : कोरोना काल (Coronavirus) में गरीब लोगों सहित अन्य जीव जंतुओं और बेजुबानों के सामने लॉकडाउन के चलते खाने पीने सहित अन्य समस्याएं सामने आ रही हैं. वहीं, मलकपाड़ा बाड़ी निवासी राम कुमार उर्फ रामू चौधरी (Ramu Chaudhary) की बेजुबान जानवरों को खाना, दाना-पानी और चारे की व्यवस्था की दीवानगी अनौखी है. उनके इस नेक काम से प्रभावित होकर युवा भी आज उनके साथ जुड़ गए हैं . 

साथ ही जिला कलेक्टर राकेश कुमार जायसवाल (Rakesh Kumar Jaiswal) ने भी उनकी प्रसंशा की है. रामू चौधरी का कहना है कि इस काम को मैं बहुत पहले से कर रहा हूं, मेरे पिता भी इस प्रकार के सामाजिक सरोकार और बेजुबान पशु पक्षियों के लिए कार्य करते थे. जिला कलेक्टर राकेश कुमार जायसवाल से प्रेरित होकर मैंने यह बेजुबान सेवा का कार्य और लगन और उत्साह से आगे बढ़ाया है. 

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स्वंय ने भ्रमण कर चुने सेवा के अलग-अलग स्थान
दिन की शुरुआत ही सेवा से होती है. भावुक होकर रामू ने बताया कि मुझे खुशी है कि जिला कलेक्टर (Dholpur Collector) की प्रेरणा से मैं अपने पिता के पद चिन्हों पर चलकर बेजुबानों की सेवा करने का सुअवसर मिला है.
उन्होंने तालाबशाही, बसेड़ी में भूतेश्वर महादेव मंदिर, बंध बारैठा, तिमनगढ़ का किला, छावनी हनुमान मंदिर, झील का बाड़ा, सागर झील, निभी तालाब, रामबाग, वन विहार, आंगई बांध, सहित बाड़ी के अन्य स्थानों पर बेजुवानों की सेवा के लिए केला, दाना-चारा व पानी अपने स्तर से सेवा करने का कार्य कर रहे हैं. कोरोना के दौरान उन्होंने हिरण, गाय, कुत्ते, बिल्ली, कबूतर, चिड़िया, मछली, गिलहरी, तोता, चिड़िया, बतख, चील, बंदर, भालू सहित अन्य सभी जानवरों की सेवा का संकल्प लिया है. 

लॉकडाउन में सभी होटल, दुकान और बाजार बंद हो गए हैं. जहां आम आदमी खाने-पीने के लिए परेशान हो रहा है तो वहीं बेजुबान जानवर भी इन दिनों खाने के लिए भटक रहे हैं. इन जानवरों की देखभाल के लिए कई सामाजिक संस्थाएं सामने आ रही हैं. जिले में इन बेजुबानों की सेवा  के लिए रामू चौधरी मसीहा बनकर सामने आए हैं. चौधरी मास्क लगाकर रोज अपने भतीजे व पुत्र विदित के साथ बेजुबानों की देखभाल व सेवा के लिए निकल जाते हैं. शहर में कोई मवेशी घायल हो या किसी का एक्सीडेंट हो गया हो तो उनका उपचार हेतु सूचना देते हैं. उनके इस काम के लिए न केवल बाड़ी शहरवासी बल्कि जिले के भी लोग उनकी सराहना करते नहीं थकते और प्रेरित होकर अन्य लोग भी वॉलंटियर्स बनकर सेवा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उपखण्ड अधिकारी बाड़ी राधेश्याम मीणा ने भी बेजुवानों की सेवा के लिए प्रोत्साहित कर मदद करने की बात कहकर उत्साह बढ़ाया. 

समझें बेजुवानों की वेदना व करें सेवा 
रामू ने बताया कि ‘लॉकडाउन के समय बेजुबान जानवरों की स्थिति खराब है. उन्हें भोजन-पानी नहीं मिल पा रहा है. बाजार खुला रहता है तो उनके खाने का इंतजाम हो जाता है. इस दौरान जानवर बीमार भी पड़ रहे हैं. उनका ख्याल रखने वाला कोई नहीं है. लेकिन जिला कलक्टर राकेश कुमार जायसवाल ने जिले के प्रत्येक ब्लॉक में पशु पक्षी प्रकोष्ठ गठित कर बेजुबानों की सुध ली है. मैं भी उनकी प्रेरणा से हमेशा कोशिश रहती है कि इन जानवरों का ध्यान रख सकूं और बेजुबान जानवरों की सेवा करने के पीछे कारण बताते हुए कहते हैं कि ‘गाय का हमने दूध पिया है. बेजुबान जानवर की स्थिति देखकर अच्छा नहीं लगता. यही वजह है कि इस काम को करने का मन हुआ है. सड़क के किनारे बैठे ये बेजुबान कई बार आकस्मिक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. 

इंसान तो अस्पताल चला जाता है, लेकिन ये बेजुबान वहां दर्द से तड़पते रहते हैं. हमारी कोशिश रहती है कि इन घायल जानवरों का इलाज की सूचना देने में मदद करें व खाने पीने की व्यवस्था उपलब्ध करावें. उन्होंने बताया कि पहले तो ये काम अकेले ही करता था, लेकिन अब कुछ साथी और मेरा बेटा व भतीजा भी मुझसे जुड़ गए हैं. अब हम सभी टीम की तरह काम करते हैं. सुबह 7 बजे से लेकर  बेजुबान और दुर्बल जानवरों की सेवा करने का कार्य अपने निजी वाहन से करते है. उन्होंने अपील की है कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन में मानवीयता का परिचय देकर बेजुवान पशु पक्षी जहां भी दिखे उन्हें भोजन जरूर उपलब्ध कराएं. बेजुबान जानवरों को इस दौरान जितना हो सके उतनी मदद करें.

रिपोर्ट : भानु शर्मा

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