North Korea leadership: उत्तर कोरिया की राजनीति में एक नया चेहरा कुछ समय से सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. ये चेहरा और किसी न नहीं, बल्कि तानाशाह किम जोंग उन की बेटी किम जू-ए का है. राजनीतिक आयोजनों में बार-बार जू-ए को देख कर ये कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद किम जोंग के बाद देश की कमान जू-ए संभालने वाली हैं. वहीं हाली ही में हुए एक बड़े आयोजन ने दुनिया भर के एक्सपर्ट का ध्यान अपनी ओर खींचा, जब किम जोन के साथ उनकी बेटी जू-ए नजर आईं. इससे ये संकेत और भी ज्यादा पुख्ता हो गए कि जू-ए को देश की अलगी कमान संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार किया जा रहा है. 

शहीद सैनिकों के परिवारों को सांत्वना
हाल ही में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान किम जोंग उन अपनी बेटी जू-ए के साथ पहुंचे. इस कार्यक्रम में रूस-यूक्रेन युद्ध में पुतिन की सेना की ओर से लड़ते हुए मारे गए सैनिकों के परिवारों से वे मिलने पहुंचे थे. साथ ही उत्तर कोरियाई सरकार ने इन परिवारों के सम्मान में नए और आधुनिक अपार्टमेंट्स का निर्माण कराया है. इस कार्यक्रम में जू-ए को केवल एक दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि उन्हें एक ‘सह-शासक’ की तरह देखा गया. उन्होंने पीड़ित परिवारों को गले लगाया और उन्हें सांत्वना दी. उत्तर कोरिया जैसे देश में जहां तानाशाह ‘देवता’ की तरह नजर आते हैं, वहीं जू-ए का ये ‘दयालु’ व्यवहार उनकी छवि को जनता के बीच लोकप्रिय बनाने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है.

उत्तराधिकारी बनने के स्पष्ट संकेत
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आयोजन किम जू-ए को अगले उत्तराधिकारी के रूप में पेश करने की दिशा में एक और बड़ा कदम है. पिछले दो सालों में जू-ए अपने पिता के साथ मिसाइल परीक्षणों, सैन्य परेडों और सरकारी बैठकों में नजर आई हैं. हाल ही में आए तस्वीरों में वे सेना के वरिष्ठ जनरलों के साथ काफी आत्मविश्वास से घिरी नजर आईं. वहीं सरकारी मीडिया में उन्हें ‘सम्मानित’ और ‘महान मार्गदर्शक’ जैसे विशेषणों से बुलाया जा रहा है. ऐसे में इसे इस बात का सबूत माना जा रहा है कि किम जोंग उन धीरे-धीरे सत्ता की बागडोर अपनी बेटी को सौंपने की तैयार कर रहे हैं और उसके लिए जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानसिक रूप से तैयार कर रहे हैं.

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रूस के साथ सैन्य गठबंधन
वहीं यह पहली बार है कि उत्तर कोरिया ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया है कि उसके सैनिक रूस के लिए लड़ रहे हैं. किम जू-ए का ऐसे संवेदनशील सैन्य और कूटनीतिक मंच पर मौजूद होना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रखा जा रहा है. रूस के साथ बढ़ते सैन्य समझौतों और पुतिन के साथ किम जोंग उन की नजदीकियों के बीच जू-ए की मौजूदगी यह बताती है कि वह आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मामलों में भी उत्तर कोरिया का चेहरा हो सकती हैं.