
जबलपुर: सूबे के मुखिया के निर्देश के बाद नकली रेमडेसिविर मामले में मुख्य आरोपी सरबजीत सिंह मोखा पर जिला प्रशासन ने अपनी नजरें टेढ़ी कर ली है. यही वजह है कि जिन मामलों को लेकर अब तक सरबजीत प्रशासन की मेहरबानियां के चलते बचा था. अब उन मामलों में एक-एक कर शिकंजा कसना शुरू हो रहा है. एमपीआरडीसी की करोड़ों रुपए की 30 हज़ार वर्ग फुट से ज्यादा की जमीन पर तनी 70 करोड़ की अमृत हाइट्स इमारत की जांच अब स्पेशल ट्रेक कोर्ट करेगा, जबकि नियम विरुद्ध तरीके से संचालित पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेज की जांच भी शुरू हो गई है.
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कलेक्टर बोलें स्पेशल कोर्ट जाएंगे
जब से नकली रेमडेसिविर मामले में सरबजीत का नाम सामने आया तब से सरबजीत सिंह मोखा चारों ओर से घिर गए. जिला प्रशासन उनके इसी मामले को स्पेशल कोर्ट में चलाने का निर्णय ले रही है. कलेक्टर कर्मवीर शर्मा कहते हैं कि अब इस मामले को स्पेशल कोर्ट में ले जाएंगे.
नियमों को ताक पर रख कर संचालित नर्सिंग कॉलेज
सरबजीत सिंह मोखा द्वारा संचालित पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेज की भी शिकायत सामने आई है. सरबजीत सिंह मोखा द्वारा कई वर्षों से इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग एवं इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल कॉलेज संचालित किया जा रहा है, जो कि सिटी अस्पताल आगा चौक की ट्रामा यूनिट की बिल्डिंग में ही संचालित किए जा रहे हैं. यह तय मानकों और आवश्यक मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं. एक ही बिल्डिंग में ट्रामा यूनिट और पैरामेडिकल कॉलेज संचालित नहीं हो सकता.
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इतनी सीटों की मान्यता मिली है
जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों की सूची में इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग को जीएनएम कोर्स की 40 सीटें, बीएससी नर्सिंग की 60 सीट, पोस्ट बेसिक बीएससी की 20 सीट और एमएससी नर्सिंग की 25 सीटों की मान्यता मिली है. जिसके लिए संस्थान के पास नियम अनुसार 23050 वर्ग फिट निर्मित एरिया होना चाहिए. इसी प्रकार इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड रिसर्च को भी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा मान्यता दी गई है.
आंख बंद कर मान्यताएं दी गई
कॉलेज से मान्यता हेतु संस्था द्वारा जो आवेदन काउंसिल के समक्ष प्रस्तुत किया गया उसमें कॉलेज की बिल्डिंग का एरिया 78060 वर्ग फीट और निर्मित एरिया 61440 वर्ग फिट बताया गया. इस प्रकार एक ही भवन में नर्सिंग कॉलेज का 23000 वर्ग फीट और निर्मित एरिया 61440 वर्ग निर्मित बताया गया है. समझ सकते हैं कि भ्रष्टाचार के आधार पर मान्यताएं अर्जित की गई और जिम्मेदारों ने भी आंख मूंदकर मान्यताएं दे दी. अब इस मामले में भी जांच की जा रही है.
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