Yemen Airstrike: सऊदी अरब की लीडरशिप वाले गठबंधन ने यमन में UAE समर्थित अलगाववादियों पर हमला किया, जिसमें कम से कम 7 लोगों के मरने की खबर है. इन्होंने जमीन के बड़े हिस्से पर कब्जा किया था.  न्यूज एजेंसी ‘AFP’ के मुताबिक वादी हद्रामौत और हद्रामौत रेगिस्तान में अलगाववादी दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (STC) के चीफ मोहम्मद अब्दुलमलिक ने बताया कि अल-खासा में एक कैंप पर 7 हवाई हमलों में 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए. 

यमन पर हमला 

बता दें कि यह घटना यमन की सऊदी समर्थित सरकार की ओर से UAE समर्थित अलगाववादियों से सैन्य अभियान वापस लेने के लिए शुरू किए गए शांति अभियान के बाद हुई. यमन में बढ़ते तनाव का यह नया उदाहरण है. यहां दिसंबर 2025 से ही सऊदी अरब और UAQ के बीच दरार बढ़ती जा रही है. दोनों एक-दूसरे के विरोधी पक्षों का समर्थन करते हैं. STC के सीनियर ऑफिसर अम्र अल बिध ने न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ को बताया,’ सऊदी अरब ने जानबूझकर एक शांतिपूर्ण अभियान की घोषणा करके इंटरनेशनल कम्युनिटी को गुमराह किया, जिसे वे कभी भी शांतिपूर्ण बनाए रखने का इरादा नहीं रखते थे.’  

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क्यों हो रही लड़ाई? 

बता दें कि सऊदी अरब की लीडरशिप वाले गठबंधन ने हद्रामौत के गवर्नर सलेम अहमद सईद अल-खुनबाशी को पूर्वी प्रांत में होमलैंड शील्ड बलों की कमान सौंपी और उन्हें सुरक्षा और व्यवस्था बहाल करने के लिए पूरी सैन्य, सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकार दिए. गवर्नर ने कहा कि यह युद्ध की घोषणा नहीं है, बल्कि हद्रामौत को अराजकता में डूबने से रोकने का एक उपाय है. ‘रॉयटर्स’ से बात करते हुए 3 यमनी यूत्रों ने बताया कि सऊदी समर्थित सरकार से संबंधित बख्तरबंद वाहन हद्रामौत में स्थित खशा कैंप की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसमें हजारों सैनिकों को रखने की क्षमता है और जिसे दिसंबर में STC ने अपने कब्जे में ले लिया था. 

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कौन किससे लड़ रहा? 

बता दें कि UAE STC का समर्थन करता है, जिसने पिछले महीने सऊदी समर्थित और इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सरकार से साउथ यमन के बड़े हिस्से पर कंट्रोल कर लिया था. रियाद ने इस कदम को एक खतरे के रूप में देखा था. पिछले हफ्ते सऊदी अरब की ओर से 24 घंटों के भीतर सैनिकों की वापसी की मांग का समर्थन करने के बाद UAE ने यमन से अपने बचे सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा की, जिससे दोनों खाड़ी सहयोगी देशों के बीच सबसे तीखे मतभेद हुए. बता दें कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने साल 2014 के अंत में तत्कालीन राष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी की सऊदी समर्थित सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था. यह समूह देश में सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति बना हुआ है. यह राजधानी सना और यमन के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों को कंट्रोल करता है.