
Six killed as separatist protest: यमन में करीब 12 साल बाद एक बार फिर तख्तापलट की आहत है. देश की अस्थायी राजधानी अदन में स्थित अल-माशिक राष्ट्रपति महल के बाहर भारी बवाल देखने को मिला है. हजारों प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हुई लोगों पर सुरक्षागार्डों की गोलीबारी का भारी विरोध किया है. माना जा रही है तीन दिन पहले चली गोली में 6 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. जिसके विरोध में प्रदर्शनकारियों की तादाद बढ़ती जा रही है. जनता और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हिंसक हो चला है.
हालात तनावपूर्ण
यमन में सरकार के खिलाफ आक्रोश- प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के बाद प्रदर्शनकारी घरों को लौटने को राजी नहीं है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गोली चलने के बाद का मंजर भयावाह था. निहत्थे लोगों पर भ्रष्ट राष्ट्रपति के गार्ड्स ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागरहे थे. जानकारी के मुताबिक, UAE समर्थित प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में महल के बाहर जमा हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने सरकार में शामिल उत्तर यमन के मंत्रियों को हटाए जाने की मांग की थी. सुरक्षा बलों और राष्ट्रपति गार्ड ने उन्हें रोकने के लिए पहले बैरिकेडिंग की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने. भीड़ के आगे बढ़ने पर गोलीबारी की गई. गोलियों की आवाज से इलाके में भगदड़ मच गई. हालांकि हताहतों की संख्या को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है.
क्या है एसटीसी कर रहा अलग देश की मांग
आपको बताते चलें कि एसटीसी लंबे समय से दक्षिण यमन को अलग देश बनाने की मांग करता रहा है, जिससे देश में राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यमन में एसटीसी (Southern Transitional Council – STC) का गठन 2017 में गठित एक प्रमुख दक्षिणी अलगाववादी संगठन के रूप में हुआ था, जो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के समर्थन से दक्षिण यमन को एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए काम कर रहा है. यह गृहयुद्ध में हौथी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने के साथ-साथ सऊदी समर्थित सरकारी बलों के साथ भी संघर्ष में रहता है. इसी की वजह से सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव बना हुआ है.
आपको बताते चलें कि यमन में पिछला बड़ा तख्तापलट सितंबर 2014 से फरवरी 2015 के बीच तब हुआ था, जब ईरान समर्थित हूती (Houthi) विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था. हूतियों ने 21 सितंबर 2014 को सरकारी इमारतों पर नियंत्रण किया और जनवरी 2015 में राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी को इस्तीफा देने और नजरबंद रहने पर मजबूर कर दिया. 6 फरवरी 2015 को उन्होंने औपचारिक रूप से सत्ता पर कब्जा करते हुए संसद भंग कर दी थी.
यमन में उत्तर-पश्चिम हिस्से पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है.
जबकि दूसरे इलाकों पर सऊदी समर्थित सरकार का नियंत्रण है.
यूएई समर्थित मिलिशिया भी अपना असर है.
यमन का राजनीतिक संकट
पिछले महीने जनवरी में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ते तनाव के कारण यमन के प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जिसे फौरन स्वीकार कर लिया गया था. अब देश की जनता राष्ट्रपति से गद्दी छोड़ने की मांग कर रही है.

