
Russian assets: क्रेमलिन ने रूसी जमे हुए संपत्तियों (फ्रोजन एसेट्स) की जब्ती या उपयोग को ‘चोरी’ करार देते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी कदम का जवाब जरूर दिया जाएगा. रूस ने स्पष्ट किया कि इसमें शामिल देशों, कंपनियों और व्यक्तियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे, जिसमें कानूनी कार्रवाई और जवाबी जब्ती शामिल है. यूरोपीय संघ के हालिया फैसले से यूरोप में चिंताएं बढ़ गई हैं, कई देश रूसी प्रतिक्रिया से डरे हुए हैं.
रूस का खुला ऐलान?
सरकारी न्यूज एजेंसी टास के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दमित्री पेसकोव ने कहा, “हमने बार-बार चेतावनी दी है कि रूसी संपत्तियों की जब्ती से जुड़ी किसी भी कार्रवाई का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ा जाएगा. जिन्होंने सामूहिक रूप से फैसले लिए, जिन्होंने अकेले फैसले लिए और जिन्होंने उन्हें लागू किया, वे सभी जिम्मेदार होंगे.” उन्होंने आगे कहा, “इसके लिए सभी संभव कानूनी तरीकों का उपयोग किया जाएगा.”
यूरोपीय संघ की यूक्रेन फंडिंग पर असफलता
इस बीच, ब्रसेल्स में गुरुवार को हुए यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन में नेता यूक्रेन को रूसी जमे हुए संपत्तियों के समर्थन से मुआवजा लोन देने के अपने मुख्य योजना में असफल रहे. बेल्जियम की असीमित गारंटी की मांग के कारण यह योजना रुक गई. परिणामस्वरूप, EU नेताओं ने वैकल्पिक योजना अपनाई और अगले दो वर्षों (2026-2027) के लिए यूक्रेन को संयुक्त कर्ज के रूप में 90 बिलियन यूरो जुटाने पर सहमति जताई. यह लोन EU बजट से समर्थित होगा और ब्याज-मुक्त होगा. यूक्रेन इसे तभी चुकाएगा जब रूस युद्ध क्षति की भरपाई करेगा. यूरो न्यूज के अनुसार, हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाकिया इस योजना में शामिल नहीं होंगे. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने इस प्रयास का नेतृत्व किया, लेकिन बेल्जियम की मांगों ने इसे असंभव बना दिया.
शिखर सम्मेलन के बाद प्रतिक्रियाएं
सम्मेलन के बाद, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने कहा कि यूक्रेन को फंडिंग का मुख्य लक्ष्य हासिल कर लिया गया है. फ्रेडरिक्सेन ने पत्रकारों से कहा, “आज के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि यूक्रेन के लिए हमारा समर्थन पक्का है.”समिट से पहले हंगरी ने संकेत दिया था कि वह इस योजना से सहमत नहीं होगा. हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने यूक्रेन को वित्तीय मदद देने का विरोध किया है और रूस-यूक्रेन संघर्ष को संभालने के EU के तरीकों की आलोचना की है.
किन देशों में खौफ
हंगरी, बेल्जियम, इटली और ऑस्ट्रिया जैसे देश रूसी जवाबी कार्रवाई से चिंतित हैं. हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने इसे “डेड एंड” बताया है. बेल्जियम, जहां अधिकांश रूसी संपत्तियां जमा हैं, सबसे ज्यादा जोखिम में है.
