
उप राष्ट्रपति सचिवालय

विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, सदैव साथ-साथ चल सकते हैं: उपराष्ट्रपति
आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और भारत के सभ्यतागत ज्ञान का समन्वय सतत भविष्य की कुंजी: उपराष्ट्रपतिपीढ़ियों से वन क्षेत्रों के साथ रहने वाले समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करें: उपराष्ट्रपति
वन, वन्यजीव और समुदायों की रक्षा को अपने करियर की सफलता का पैमाना बनाएं: उपराष्ट्रपति
प्रविष्टि तिथि: 19 AUG 2026 6:10PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2025-2027 बैच के परिवीक्षार्थियों तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan today addressed the Indian Forest Service (IFS) probationers of the 2025–2027 batch and officers of the Royal Bhutan Forest Service undergoing training at the Indira Gandhi National Forest Academy (IGNFA), Dehradun.
The Vice President… pic.twitter.com/HzANXtA3Lc
— Vice-President of India (@VPIndia) August 19, 2026
उन्होंने कहा कि देश की पारिस्थितिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में भारतीय वन सेवा का योगदान महत्वपूर्ण है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं और सदैव साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण और विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका तथा वर्तमान आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का आग्रह किया।
व्यक्तिगत उत्कृष्टता के बजाय टीम की उत्कृष्टता का आह्वान करते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही राष्ट्रों और संस्थानों का निर्माण करता है। उन्होंने पीढ़ियों से वनों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के साथ सामंजस्य में जीवन जीने वाले समुदायों द्वारा संचित पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
लोक सेवा में सत्यनिष्ठा के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता” और कठिन निर्णयों में संविधान, कानून, विज्ञान तथा व्यापक जनहित का मार्गदर्शन होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
वानिकी में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के अधिकारियों से क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता के साथ रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा-आधारित प्रणालियों को समन्वित करने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के सतत भविष्य के निर्माण में आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और भारत के सभ्यतागत ज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा।
उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं और इसे एक उत्साहजनक बदलाव तथा नारी शक्ति का प्रमाण बताया।





अधिकारियों को अपने करियर का आकलन केवल उनके द्वारा धारण किए गए पदों से न करने की सलाह देते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे अपने योगदान का आकलन पुनर्स्थापित किए गए वनों, संरक्षित किए गए वन्यजीवों, जिन समुदायों का विश्वास उन्होंने अर्जित किया है और भावी पीढ़ियों के लिए छोड़ी गई विरासत के आधार पर करने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों से सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान करते हुए कहा: “राष्ट्र प्रथम”।
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan was accorded a warm welcome upon his arrival at Jolly Grant Airport, Dehradun, today.
Governor of Uttarakhand Lt. Gen. Gurmit Singh (Retd.), Chief Minister of Uttarakhand Shri Pushkar Singh Dhami, and other dignitaries received the Vice… pic.twitter.com/PMB6zNRbNJ
— Vice-President of India (@VPIndia) August 19, 2026
****
PR/ASM/VM
(रिलीज़ आईडी: 2301289) आगंतुक पटल : 12

