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पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय

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संसदीय प्रश्न: कांगड़ा-चंबा-धर्मशाला बेल्ट में भूकंप का जोखिम

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 2:19PM by PIB Delhi

सरकार ने कांगड़ाचंबा इलाके में भूकंप की गतिविधियों पर ध्यान दिया है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) राष्ट्रीय भूकंप वैज्ञानिक नेटवर्क के ज़रिए पूरे देश में भूकंपों पर लगातार नज़र रखता है। जून 2026 के दौरान, एनसीएस ने अपने 24×7 भूकंप निगरानी केंद्र के ज़रिए हिमाचल प्रदेश के कांगड़ाचंबा इलाके में कुल 16 भूकंपों का पता लगाया और उनकी रिपोर्ट दी, जबकि सवाल में 18 भूकंपों का ज़िक्र किया गया था। इन भूकंपों की तीव्रता के हिसाब से जानकारी इस प्रकार है:

तीव्रता की रेंज

2.0 – 2.9

3.0 – 3.9

4.0 – 4.9

5.0 – 5.9

भूकंपों की संख्या

12

3

कोई नहीं

1

कांगड़ाचंबाधर्मशाला इलाका भूकंप के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा जोखिम वाले ज़ोन, यानीसीस्मिक ज़ोन V’ में आता है। एनजीआरआईऔर अन्य संस्थानों के वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण इस इलाके में 7.0 से ज़्यादा तीव्रता वाले बड़े भूकंप सकते हैं।

सरकार ने राष्ट्रीय भूकंप वैज्ञानिक नेटवर्क का विस्तार करके और एनसीएस द्वारा चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करके भूकंप की निगरानी को मज़बूत किया है। अभी, एनसीएस पूरे देश में 24×7 रियलटाइम भूकंप निगरानी के लिए 172 सीस्मिक स्टेशनों का राष्ट्रीय भूकंप वैज्ञानिक नेटवर्क चलाता है। इन 172 स्टेशनों में से 7 स्टेशन (शिमला, धर्मशाला, तिस्सा, सुंदरनगर, कल्पा, भाखड़ा और पोंग डैम) हिमाचल प्रदेश में हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) राज्य सरकारों के साथ मिलकर मॉक ड्रिल, अधिकारियों और फर्स्ट रिस्पॉन्डर की ट्रेनिंग, आपदा प्रबंधन योजनाओं को तैयार करने और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मज़बूत करने के ज़रिए भूकंप से निपटने की तैयारी को बढ़ावा देता है।  सरकार ने नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के भूकंपरोधी डिज़ाइन कोड और मॉडल बिल्डिंग बायलॉज़ के ज़रिए भूकंपरोधी निर्माण को अपनाने और लागू करने के लिए परामर्श और दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन कोड्स को लागू करने की ज़िम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों की है।

सरकार जोखिम का आकलन, तैयारी, क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने और संबंधित अधिकारियों द्वारा कमज़ोर लाइफ़लाइन इमारतों की रेट्रोफ़िटिंग को बढ़ावा देने के ज़रिए जानमाल के नुकसान को कम करने की रणनीति अपनाती है। एनडीएमए भूकंप से सुरक्षा और तैयारी को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से जनजागरूकता अभियान, स्कूल और समुदाय में जागरूकता कार्यक्रम, मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।

वैज्ञानिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों द्वारा भूकंपीय माइक्रोज़ोनेशन (seismic microzonation) अध्ययन किए जाते हैं। सरकार आपदा से निपटने की क्षमता और तैयारी को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न आपदा प्रबंधन और रोकथाम योजनाओं के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देती रहती है।

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/पीके

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