US Immigration policy: अमेरिका ने दक्षिण एशिया समेत कई इलाकों के अवैध घुसपैठियों को हथकड़ी लगाकर खास जंबो जेट से वापस भिजवाया. ट्रंप के उस फैसले की अमेरिका समेत दुनियाभर में आलोचना हुई. इससे इतर अमेरिका में मौजूद हजारों अप्रवासियों की वतन वापसी कराने के लिए ट्रंप ने जितना भारी भरकम बजट अलॉट किया उसके बारे में जानकर लोग इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल महज 300 माइग्रेंट्स को उनके मूल देश या तीसरे देशों डिपोर्ट करने के लिए कम से कम 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 362 करोड़ रुपये के समझौते किए हैं.
ये कहां की समझदारी?
न्यूज एजेंसी एपी ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिकी संसद की फॉरेन रिलेशंस कमेटी के डेमोक्रेटिक सदस्य के हवाले से दावा किया कि साल 2025 में इमिग्रेशन अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका से अवैध अप्रवासियों को पूरे दमखम से बाहर भगाने का टारगेट समय से पहले पूरा करने के लिए पानी की तरह बहाए गए अमेरिकी टैक्स पेयर्स के पैसों को बेतुका फैसला बताया है. डेमोक्रेट्स पार्टी के कई अन्य नेताओं ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए तीन सौ लोगों के लिए 300 करोड़ से ज्यादा रकम खर्च करने को अदूरदर्शी फैसला करार दिया है.
पांच देशों पर 67 करोड़ खर्च
इतनी रकम खर्च होने की आलोचना होने पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जवाब दिया. हाल ही में संसद में हुई सुनवाई के दौरान लोगों को डिपोर्ट किए जाने की जल्दी से जुड़ा सवाल पूछने पर उन्होंने कहा, हमने ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जो गैंग से जुड़े थे, जो कुख्यात अपराधी थे. उनका अमेरिका में रहना सही नहीं था इसलिए उन्हें डिपोर्ट करना जरूरी था. हम अपने महान देश में किसी भी गैंग को नहीं फटकने देंगे.
गिनी, रवांडा, अल सल्वाडोर, इस्वातिनी और पलाऊ जैसे पांच देशों के अप्रवासियों को उनके मूल देशों या किसी तीसरे देश में डिपोर्ट करने के लिए 55 से 67 करोड़ रुपये के भुगतान का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल मार्च में अल सल्वाडोर समेत दूसरे देशों में बड़े पैमाने पर लोगों को डिपोर्ट किया गया.
तीसरे देश से मतलब
ये वो देश हैं जो अमेरिका में मौजूद अप्रवासियों को अपने देश में कुछ शर्तों के साथ रखने के लिए तैयार हो जाते हैं. एक एजेंसी ने इस डिपोर्टेशन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की तो पता चला कि ट्रंप प्रशासन उन देशों के साथ भी डिपोर्टेशन प्रोग्राम के तहत समझौते कर रहा है जो अमेरिका में शरण चाहने वालों को उनके क्लेम प्रोसेस होने तक अपने देश में रखने को तैयार हैं.
