
Lockerbie Air Disaster: 37 साल पहले आसमान में कुछ ऐसा हुआ था कि जिसने सैकड़ों जिंदगियों को पल भर में खत्म कर दिया था. यह दर्ज आज भी दुनिया को कंपा देता है. करीब 37 साल पहले 21 दिसंबर 1988 को अमेरिका जा रही पैन एम फ्लाइट 103 को बम से उड़ा दिया गया, जिसमें 270 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी. इस हादसे ने न सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन, बल्कि 21 देशों के परिवारों को गहरे जख्म दिए. यह फ्लाइट लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से रवाना हुई थी और न्यूयॉर्क जा रही थी. लेकिन बीच में ही बम धमाका हुआ और इस फ्लाइट में मौजूद सभी की जान चली गई. अब दशकों बाद इसी केस में नया और निर्णायक मोड़ सामने आया है. 72 साल का लीबियाई नागरिक अबू उजैला मसूद अमेरिका की जेल में अपनी बारी का इंतजार कर रहा है जिस पर बम बनाने का आरोप है.
एक जली हुई पैंट और बदल गई जांच की दिशा
Lockerbie एयर डिजास्टर की रिपोर्ट में उस समय सबूतों ने कई सवाल खड़े किए थे, लेकिन एक जली हुई पैंट का छोटा-सा टुकड़ा ऐसा सुराग बना, जिसने पूरी जांच की दिशा ही बदल कर रख दी. Lockerbie की जांच किसी थ्रिलर मूवी की ही तरह है. स्कॉटलैंड के लॉकरबी शहर में बम धमाके के बाद यह विमान गिरा तो वह पल भर में दुनिया का सबसे बड़ा क्राइम सीन बन गया था.
इस मलके की जांच में एक जली हुई पैंट का एक छोटा सा टुकड़ा मिला जिस पर Euroki ब्रांड का लेबल लगा हुआ था. यह लेबल जांच करने वालों को माल्टा के एक छोटे से कपड़ों के स्टोर तक ले गया. जिसके बाद इस कपड़े की दुकानदार टोनी गुच्ची ने पहचान की कि यह सामान एक लीबियाई शख्स ने खरीदा था. इसी एक सुराग ने पूरी जांच का रुख ईरान और सीरिया से मोड़कर लीबिया को ओर कर दिया.
तोशिबा रेडियो में छिपा था मौत का सामान
FBI और स्कॉटिश पुलिस की जांच के अनुसार फ्लाइट को तबाह करने वाला बम एक तोशिबा रेडियो कैसेट प्लेयर के अंदर छिपाकर सैमसोनाइट सूटकेस में रखा गया था. जिसमें MST-13 नाम के टाइमर का यूज किया गया था जिसे लीबिया ने स्विट्जरलैंड की एक कंपनी से खरीदा था. इसी सबूत के आधार पर साल 2001 में अब्दुल बासेट अल-मेग्राही को दोषी करार दिया गया था. बता दें कि मेग्राही की मौत साल 2012 में ही हो चुकी है.
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क्या अब खुलेगा 37 साल पुराना पूरा सच?
अब अमेरिका के हाथ लगा है मास्टरमाइंड अबू उजैला मसूद. FBI का दावा है कि मसूद ने खुद कबूला है कि उसने कर्नल गद्दाफी के आदेश पर यह बम तैयार किया था. मसूद पर आरोप है कि उसने बर्लिन डिस्को हमले के लिए भी बम बनाए थे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कर्नल मुअम्मर गद्दाफी लीबिया के नेता थे, जो 1969 से 2011 तक देश के सत्ता में रहे.
हालांकि बहुत से लोग आज भी मानते हैं कि असली गुनहगार कोई और है लेकिन अमेरिकी कोर्ट में होने वाला यह ट्रायल उन परिवारों के लिए इंसाफ की आखिरी उम्मीद है जिन्होंने 1988 की उस काली रात को अपने अपनों को खो दिया था.
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