
संस्कृति मंत्रालय

अंतर्जलीय सांस्कृतिक विरासत
प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 3:44PM by PIB Delhi
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अंतर्जलीय पुरातत्व विभाग द्वारका और बेट द्वारका (गुजरात), महाबलीपुरम (तमिलनाडु) और कराईकल (पुदुचेरी) में वर्तमान में अनुसंधान और अन्वेषण गतिविधियां चला रहा हैं।
इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग को पूमपुहार (तमिलनाडु) में और समुद्री पुरातत्व केंद्र, राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान को बेट द्वारका और छारी तथा गंगाता बेट (गुजरात) में पानी के नीचे खुदाई/अन्वेषण के लिए लाइसेंस प्रदान किया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्जलीय पुरातत्व विभाग को आवंटित बजट का विवरण निम्नलिखित है:
वर्ष | आज तक का आवंटन (रुपये में) | आज तक का व्यय (रुपये में) |
2025-26 | 75,40,000/- | 74,91,064/- |
2026-27 | 66,50,000/- | 25,63,894/- |
इसके अलावा, तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने जमीन के साथ-साथ पानी के नीचे पुरातात्विक खुदाई के लिए 7 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के लिए 20 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्जलीय पुरातत्व विभाग ने पुरातत्वविदों को प्रशिक्षण देने और जलमग्न स्थलों का सर्वेक्षण करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है।
निम्नलिखित स्थलों को 2030 तक जलमग्न अन्वेषण/खुदाई के लिए चिन्हित किया गया है:
- द्वारका और बेट द्वारका (गुजरात)
- विजय दुर्ग (महाराष्ट्र)
- जंजीरा (महाराष्ट्र)
- कराईकल (पुदुचेरी)
- महाबलीपुरम (तमिलनाडु)
यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में लिखित जवाब में दी।
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पीके/केसी/एके/एनजे
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