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केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ में सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन की अध्यक्षता की
प्रविष्टि तिथि: 08 AUG 2026 5:54PM by PIB Delhi

रसायन और उर्वरक तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ के दूसरे दिन सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से किया था।
यह राउंडटेबल सम्मेलन भारत के मेडटेक (MedTech) सेक्टर के भविष्य पर चर्चा करने के लिए मेडिकल डिवाइस उद्योग के वरिष्ठ नीति-निर्माताओं और लीडर्स को एक मंच पर लाया। इसमें फार्मास्युटिकल्स विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी; नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास; स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल; स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती पुण्या सलिला श्रीवास्तव; उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव श्री अमरदीप सिंह भाटिया; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री सुनील कुमार बरनवाल; फिक्की के महासचिव श्री अनंत स्वरूप; फिक्की मेडिकल डिवाइसेस कमेटी के अध्यक्ष श्री तुषार शर्मा; फिक्की मेडिकल डिवाइसेस कमेटी के सह–अध्यक्ष श्री हिमांशु बैद; और फिक्की मेडिकल डिवाइसेस कमेटी के सह–अध्यक्ष श्री भरत शेषा शामिल हुए। राउंडटेबल सम्मेलन में ग्लोबल और घरेलू मेडटेक कंपनियों तथा एमएसएमई के 40 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने भाग लिया।

सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन ने भारत के मेडिकल डिवाइस इकोसिस्टम को मजबूत करने, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए अपनी ग्लोबल पहुंच बढ़ाने हेतु अनुकूल माहौल तैयार करने पर उच्च–स्तरीय बातचीत के लिए मंच प्रदान किया।
इससे पहले भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने “भारत की यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) की राह में इनोवेटिव थेरेपी के लिए रीइम्बर्समेंट (खर्च की भरपाई) के तरीके“ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने सबूत-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल इनोवेशन का नतीजा किफायती, आसानी से उपलब्ध और टिकाऊ हेल्थकेयर के रूप में सामने आना चाहिए।

डॉ. बहल ने इस बात पर बल दिया कि रेगुलेटरी, रीइम्बर्समेंट और खरीद से जुड़े फैसले ठोस क्लिनिकल सबूतों पर आधारित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सबूत-आधारित तरीके बहुत ज़रूरी हैं कि इनोवेटिव टेक्नोलॉजी अपनी क्लिनिकल वैल्यू साबित करें और मरीज़ों के बेहतर नतीजों में सार्थक योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि क्लिनिकल असर के बारे में उच्च–गुणवत्ता वाले सबूत, लागत–प्रभावशीलता और स्वास्थ्य–आर्थिक मूल्यांकन के लिए बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सबूत जुटाने से छूट मांगने पर टेक्नोलॉजी के लिए हेल्थ टेक्नोलॉजी असेसमेंट (एचटीए), रीइम्बर्समेंट और खरीद अधिकारियों के सामने अपनी वैल्यू साबित करना मुश्किल हो सकता है।

प्रतिभागियों ने एक ऐसे फ्रेमवर्क की ज़रूरत पर जोर दिया जो नई मेडिकल टेक्नोलॉजी को अपनाने में मदद कर सके। इसके साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करे कि स्वास्थ्य सेवा संसाधनों का सही इस्तेमाल हो। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में इनोवेटिव मेडिकल टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए भरोसेमंद क्लिनिकल सबूत, पारदर्शी एचटीए प्रक्रियाएं, सही कीमत, टिकाऊ रीइम्बर्समेंट सिस्टम, डॉक्टरों की ज़्यादा भागीदारी और मज़बूत प्रशिक्षण प्रणाली की ज़रूरत होगी। चर्चा का मुख्य फोकस ऐसा रीइम्बर्समेंट इकोसिस्टम बनाने पर रहा जो इनोवेटिव टेक्नोलॉजी तक पहुंच और उनकी किफायती कीमत व वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखे।
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पीके/केसी/पीके
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