
कोंडागांव: कोरोना महामारी व लॉकडाउन के बीच कोंडागांव के युवाओं ने की मानवता की मिसाल पेश की है. यहां एक बेसहारा बुजर्ग महिला के टूटते झोपड़ी को देख 12 युवाओं ने उन्हें स्वयं मकान बनाकर देने का फैसला किया है. युवाओं ने घर के लिए पैसे भी इकट्ठा करना शुरू कर दिया है.
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दरअसल एक और जहां कोरोना बीमारी के चलते सभी अपने अपने मकानों पर कैद है. ऐसे में एक वर्ग ऐसा भी है जो भूखे को भोजन और अन्य सामग्रियां पहुंचाकर मदद पहुंचा रहे है. ऐसे ही कोंडागांव में शांति फाउंडेशन के युवाओं का दल इस समय गरीबो बेसहारों के लिये मसीहा के रूप में काम कर रहा है.
बुजुर्ग महिला के लिए आगे आया दल
शांति फाउंडेशन नाम की संस्था के युवाओं ने बताया कि रोज सुबह शाम ये गरीबों को राशन व बेसहारों को भोजन देने निकलते है. ऐसे में इन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग महिला जो एक झोपड़ी में अकेले रहती है उसके साथ उसका कोई अपना नहीं है और जब उसे भोजन देने अंदर गए तो पता चला कि इसकी यह झोपड़ी कभी भी धराशाही हो सकती है. बुजुर्ग को भोजन देकर उसके लिए इस टूटे झोपड़ी को तोड़कर नया निर्माण का ठानकर दूसरे दिन ही काम शुरू कर दिया.
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नींव भी रख दी
बरसात में बुजुर्ग महिला का मकान गिर न जाय यह सोचकर युवाओं ने इस महिला का मदद शुरू की और बुजुर्ग महिला के झोपड़ी को तोड़ने से पहले पास में ही उसके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था पहले बनाई गई. फिर आधी टूटी झोपड़ी को गिराकर नींव की खुदाई शुरू कर दी. युवाओं का कहना है एक सप्ताह में मकान एक कमरे का पूरा कर देंगे. जिसमे एक शौचालय भी बनवा रहे है. बुजुर्ग महिला बहुत खुश है और अपने आशियाने को बनता देखकर युवाओं को दुआ दे रही है.
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