
Munger: कोरोना महामारी के बीच मुंगेर के लाइफ केयर अस्पताल (Life Care Hospital) में कोरोना मरीजों से मोटा पैसा ऐंठने के बाद रेफर करने के मामले में जिला प्रशासन ने निजी अस्पताल के संचालक के खिलाफ कार्रवाई की है.
जानकारी के अनुसार, सोमवार को सिविल सर्जन और एसडीओ ने संयुक्त रूप से अस्पताल में छापा मारा. छापेमारी की जानकारी से पहले लाइफ केयर हॉस्पिटल संचालक हॉस्पिटल बंद कर वहां से फरार हो गया.
इसके बाद इस मामले में सिविल सर्जन ने पत्र जारी कर कहा कि 24 घंटे के अंदर कागजात प्रस्तुत नहीं करने पर अस्पताल संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और हॉस्पिटल को सील किया जाएगा.
यह मामला असरगंज (Asarganj) प्रखंड के विक्रमपुर स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल का है. गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा बिना अनुमति के कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज करने को लेकर कार्रवाई की जा रही है.
प्रशासन को शिकायत मिली थी कि अस्पताल रोगी से मोटी रकम वसूल रहा है. हालत बिगड़ने पर रेफर करने के बाद एक मरीज की मौत हो गई, जिसके बाद मृतक के परिजन ने इस बारे में जानकारी जिला सिविल सर्जन हरेंद्र कुमार आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी रंजीत कुमार, अनुमंडल अधिकारी वसीम अकरम आदि को दी थी.
इसके बाद वरीय प्रशासनिक अधिकारी के साथ थानाध्यक्ष सुनील कुमार साहनी असरगंज बाजार के विक्रमपुर मोहल्ला स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल रविवार को जांच करने पहुंचे. असरगंज विक्रमपुर स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल निरीक्षण के दौरान बाहर से ताला बंद पाया गया तथा संचालक फरार था. मौके पर मुंगेर सिविल सर्जन हरेंद्र कुमार आलोक ने प्रभारी चिकित्सा
पदाधिकारी ललन कुमार सिंह को निर्देश देते हुए कहा कि लाईफ केयर हॉस्पिटल संचालक मनोज चौधरी को नोटिस देते हुए 24 घंटे के अंदर कागजात प्रस्तुत करने की बात कही. अधिकारियों ने कागजात प्रस्तुत नहीं किए जाने पर हॉस्पिटल को सील करने एवं संचालक पर प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही है. वहीं, इस मामले में सिविल सर्जन ने कहा कि इस हॉस्पिटल में कोरोना से जिन लोगों ने भी इलाज कराया है या किसी प्रकार की समस्या हुई है इसका कोई लिखित आवेदन नहीं आया है.
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उन्होंने कहा तारापुर एसडीओ रंजीत कुमार द्वारा जानकारी मिली की लाइफ केयर हॉस्पिटल असरगंज कोरोना मरीजों का इलाज कर रहा है लेकिन जब हम लोग पहुंचे तो हॉस्पिटल में ताला लटका हुआ था.
उन्होंने कहा इस हॉस्पिटल को कोविड को लेकर अधिकृत नहीं किया गया है लेकिन किन परिस्थितियों में कोविड मरीजों का इलाज कर रहे थे, इसको लेकर उन्हें एक पत्र जारी किया गया है और जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है.
(इनपुट- प्रशांत कुमार)
