
Jaipur : कोरोना-लॉकडाउन में मुनाफाखोरी-जमाखोरी ने बाजार में फल-सब्जी से लेकर खाद्य सामग्री सहित दाल-दलहन के दामों में लंबी छलांग लगा दी है, लेकिन अब सरकार ने मुनाफाखोरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (Food and Civil Supplies Department) ने अधिसूचना जारी करते हुए संभावित जमाखोरी को रोकने के लिए दालों के विक्रेताओं, मिल मालिकों, व्यापारियों और आयातको से गोदामों का पता और स्टॉक का लेखा-जोखा मांगा है.
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दालों के स्टॉक पर अब सरकारी अफसरों की निगाह
प्रदेश में अब दाल व्यापारियों के गोदामों में रखे स्टॉक (Stock) पर सरकारी अफसरों की निगरानी रहेगी. आसमान छूते दालों के दाम को कंट्रोल करने और संभावित जमाखोरी को रोकने के लिए खाद्य विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. अब हर सप्ताह व्यापारियों को दाल के स्टॉक का लेखा-जोखा एसडीएम और जिला रसद अधिकारी को देना होगा. खाद्य विभाग सचिव नवीन जैन ने कहा कि लॉकडाउन के समय दालों की कीमतें बढ़ना बेहद चिंता की बात है.
जमाखोरी के कारण कालाबाजारी न हो इसके लिए ये अफसरो की टीमों को निगरानी के लिए लगाया गया है. वैसे ही लॉकडाउन के कारण कामकाज बहुत चल रहा है. जैन ने बताया की दालों के विक्रेताओं मिल मालिकों व्यापारियों और आयातकों को उपलब्ध दाल के वास्तविक अंतिम स्टॉक की घोषणा 21 मई तक देनी होगी. दालों के सभी डीलरों को निर्धारित प्रपत्र में स्टॉक रजिस्टर का संधारण करना होगा. स्टॉक की साप्ताहिक सूचना सप्ताह समाप्ति के तीन दिवस में निर्धारित प्रारूप में तैयार कर संबंधित उपखंड अधिकारी या जिला रसद अधिकारी को प्रस्तुत करनी होगी.
गोदामो में रखे स्टॉक का अफसर करेंगे औचक निरीक्षण
आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी राजस्थान व्यापारिक वस्तु (अनुज्ञापन एवं नियंत्रण) आदेश 1980 के अनुसूची 2 में संशोधन करते हुए अनुसूची में साबुत या दली हुई दालें यथा उड़द, मूंग, अरहर, मसूर, मौठ, लोबिया राजमा, चना, मटर और अन्य दालों को जोड़ा गया है. खाद्य विभाग के सचिव नवीन जैन ने बताया कि जिला रसद अधिकारी दालों के स्टॉक का नियमित रूप से पर्यवेक्षण करते हुए कीमतों की साप्ताहिक रिपोर्ट भेजेंगे.
जमाखोरी को रोकने के लिए दाल के डीलरों के स्टॉक की आकस्मिक जांच की जाएगी. उन्होंने व्यापारियों से आव्हान किया है कि कोविड संक्रमण के इस दौर में आमजन को खाद्य वस्तुओं उचित कीमत पर विक्रय करें. जमाखोरी करने वाले व्यापारियों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी.
5 क्विंटल की मात्रा तक स्टॉक रखने वाले खुदरा व्यापारियों को राहत
स्टॉक रजिस्टर को संबंधित उपखंड अधिकारी या जिला रसद अधिकारी से सत्यापन करवाया जाना जरूरी होगा. व्यापारियों को दालों के वास्तविक गोदाम भंडारण स्थल का पता और विवरण अपने स्टॉक रजिस्टर में दर्ज करनी होंगी. उन्होंने बताया कि सभी प्रकार की दालों का स्टॉक सम्मिलित करते हुए 5 क्विंटल की मात्रा तक स्टॉक रखने वाले खुदरा व्यापारियों पर यह लागू नहीं होगा. साप्ताहिक सूचना रिटर्न को ईमेल के माध्यम से संबंधित जिला रसद अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी.
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