
कोरिया/सरवरः छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक गांव है, जिसमें ग्लूकोमा के एक दो नहीं बल्कि 70 से ज्यादा मरीज हैं. बता दें कि गांव में एक ही परिवार के 12 लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और अपनी जवानी में ही अपनी आंखों की लगभग रोशनी खो चुके हैं. दुख की बात ये है कि इस गांव की अभी तक किसी ने सुध नहीं ली है, जिससे बीमारी से पीड़ित लोग लाचारी का जीवन जीने को मजबूर हैं. हालांकि अब पंचायत अध्यक्ष ने इस गांव के लोगों की मदद के हाथ बढ़ाया है.
वंशानुगत चली आ रही बीमारी
बता दें कि कोरिया जिले की ग्राम पंचायत बड़का बहरा के आश्रित गांव केराबहरा में ग्लूकोमा के 70 से अधिक मरीज हैं. वहीं गांव के 4 लोग कुष्ट की बीमारी से पीड़ित हैं. गांव के लोगों में यह बीमारी वंशानुगत चली आ रही है. इन लोगों को अगर समय पर इलाज नहीं मिला तो इनकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है.
गरीबी की मार झेल रहे ग्रामीण
इस बीमारी के चलते गांव के युवाओं में डर बैठ गया है. साथ ही लोग इस गांव में शादी करने के लिए तैयार नहीं हैं. जिसके कारण गांव के काफी युवा अविवाहित हैं. बीमारी के कारण गांव के लोगों को काम भी नहीं मिलता है. जिसके कारण ये लोग लाचारी में गरीबी झेलने के लिए भी मजबूर हैं.
पंचायत अध्यक्ष ने बढ़ाए मदद के हाथ
वहीं जनपद पंचायत मनेंद्रगढ़ के अध्यक्ष डॉ. विनय शंकर सिंह ने अब इस गांव के बीमार लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं. वह गांव वालों की मदद के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं. कोशिश है कि गांव वालों की आने वाली पीढ़ी को तो इस वंशानुगत बीमारी से बचाया जाए. वहीं डॉ. विनय शंकर सिंह जब ग्रामीणों का हाल जानने गांव पहुंचे तो उन्हें देखकर पीड़ितों की आंखें भर आईं. गांव वालों का कहना है कि कोई तो है जो उनकी सुध लेने आया है.
विनय शंकर सिंह ने कहा कि ग्लूकोमा का इलाज महंगा होता है. एक आईड्रॉप की कीमत ही डेढ़ हजार तक होती है. ऐसे में जिन ग्रामीणों के पास काम धंधे नहीं है वह इतने महंगे इलाज का खर्च कैसे उठाएंगे? सिंह ने कहा कि वह इन लोगों की मदद के लिए विशेष रणनीति बनाने पर विचार कर रहे हैं. देखने वाली बात है कि छत्तीसगढ़ सरकार कब तक इन ग्रामीणों की सुध लेती है.
क्या होता है ग्लूकोमा
ग्लूकोमा (Glaucoma) में मरीज की दृष्टि कम हो सकती है या बिल्कुल खत्म भी हो सकती है. अगर इसका इलाज ना किया जाए तो यह समय के साथ साथ और भी खराब हो सकती है. इस स्थिति में आपको आंख में एक दबाव बनने लगता है जो समय के साथ बढ़ता जाता है. इस दबाव या प्रेशर को इंट्राओक्युलर प्रेशर कहा जाता है. ग्लूकोमा आपकी ऑप्टिक नर्व को नष्ट भी कर सकता है. ऑप्टिक नर्व आपके मस्तिष्क को तस्वीरें भेजती है. अगर इसकी स्थिति खराब होती गई तो कुछ ही सालों में आपको बिलकुल दिखना बंद भी हो सकता है.
