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नई दिल्ली: आज लगभग 6 सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है. जनवरी 2019 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है. छह साल में पहली बार सुपरमून और चंद्रग्रहण का संयोग बन रहा है. यानी आसमान में चांद आम रातों के मुकाबले ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखाई देगा. आज चांद धरती के सबसे नजदीक होता है.

क्या होता है सुपरमून
सुपर मून क्या होता है और क्या इसका प्रभाव होता है इसको समझने का प्रयास करते है. पूर्णिमा पर चांद जब पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है तो हमें वह बड़ा और चमकीला नजर आता है. इसे ही सुपरमून कहते हैं. इस दौरान सामान्य चंद्रग्रहण के मुकाबले चांद 30% तक ज्यादा बड़ा और 14% तक ज्यादा चमकदार दिखाई देता है.सुपरमून की कब दिखाई देता है
पहला चांद पृथ्वी के सबसे नजदीक हो
दूसरा उस दिन पूर्णिमा भी हो.
वैसे तो चांद का न आकार बदलता है और न ही चमक, पर धरती के पास होने से हमें ऐसा सिर्फ आभास होता है.
दरअसल चांद पृथ्वी के आसपास अंडाकार रेखा में चक्कर लगाता है. इस वजह से कई बार यह पृथ्वी के काफी नजदीक आ जाता है. इससे हमें उसका आकार सामान्य से बड़ा दिखता है.

सुपरमून पर नासा की सोच
नासा के मुताबिक सुपरमून तब होता है जब चांद की कक्षा पृथ्वी के सबसे नजदीक होती है और पूर्णिमा हो. 1979 में पहली बार सुपरमून शब्द का इस्तेमाल किया था. एक सामान्य वर्ष में दो से चार सुपरमून हो सकते हैं. पिछली पूर्णिमा के मुकाबले इस महीने पृथ्वी और चांद करीब 0.04% नजदीक रहने वाले हैं. चंद्र ग्रहण के दौरान चांद पूरे 15 मिनट तक पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा.                                                          

पूर्णिमा और सुपरमून में क्या रिश्ता
हर 27 दिन में चांद पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है. 29.5 दिन में एक बार पूर्णिमा भी आती है. हर पूर्णिमा को सुपरमून नहीं होता पर हर सुपरमून पूर्णिमा को ही होता है. जब चांद पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर होता है, उसे एपोजी (Apogee) कहते हैं और जब सबसे नजदीक होता है तो उसे पेरिजी (Perigee) कहते है.                                                                      

भारत में सुपरमून का असर
भारत में चंद्रग्रहण का असर ज़्यादा नहीं होगा. भारत मे आंशिक ग्रहण दिखाई देगा. देश के अधिकतर लोग चंद्रग्रहण नहीं देख सकेंगे क्योंकि ग्रहण के समय भारत के अधिकांश हिस्सों में चांद पूर्वी क्षितिज से नीचे होगा. जब चंद्रोदय हो रहा होगा, तब पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के लोग चंद्रग्रहण का आखिरी हिस्सा देख सकेंगे.
भारतीय समयानुसार अपराह्न चार बजे पृथ्वी सूर्य और चांद के ठीक बीच में होगी. दुनियाभर के ऑब्जर्वर आसमान साफ होने पर सुपरमून को देख सकेंगे. पर भारत, नेपाल, पश्चिमी चीन, मंगोलिया और पूर्वी रूस के कुछ हिस्सों में आंशिक ग्रहण ही दिखेगा. इस दौरान चांद, पृथ्वी की छाया से बाहर निकल रहा होगा.                                                                            

भारत में ग्रहण का समय
भारत में दिन के 2 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 19 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा. यानी कुल 5 घंटे 2 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा.                                                                                              

सूतक के नियम
चंद्रग्रहण का सूतक सामान्यतः 9 घंटे पहले आरंभ होता है. भारत में इस बार सूतक अमान्य है. इसलिए धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं ग्रहण पर लागू नहीं होंगी.                                                                      

कैसे देख सकेंगे चंद्र ग्रहण
भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा. कुछ हिस्सों में चंद्र ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा.  हालांकि, चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देने के बावजूद आप ऑनलाइन इस खगोलीय घटना को देख सकते हैं. कई चैनलों ने तो अभी से काउंटडाउन भी शुरू कर दिया है.

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